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चंडीगढ़ में आउटसोर्स भर्ती के घोटाले का खुलेगा राज, CBI की रेड और विजिलेंस ने भी मांगी तीन साल के टेंडरों की रिपोर्ट

Published: Sun, 18 Oct 2026 07:02 PM (IST)

चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम में आउटसोर्स भर्ती घोटाले की जांच तेज हो गई है। सीबीआई की रेड हो चुकी ...और पढ़ें

आउटसोर्स भर्ती में हुए घोटाले में सीबीआई कर चुकी है रेड।

आउटसोर्स भर्ती में हुए घोटाले में सीबीआई कर चुकी है रेड।

HighLights

  1. विजिलेंस ने तीन साल के आउटसोर्स टेंडरों की जांच के आदेश दिए।

  2. सीबीआई ने चार सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों पर छापेमारी की थी।

  3. टेंडर शर्तों में पक्षपात के आरोपों की होगी गहन पड़ताल।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम में आउटसोर्स भर्ती में हुए घोटाले का अब सारा सच जल्द सामने आएगा। सर्विस प्रोवाइडर चार कंपनियों के ठिकानों पर सीबीआई की रेड कर चुकी है और विजिलेंस ने तीन साल के टेंडरों की रिपोर्ट मांग ली है।

बोर्ड, निगमों, कार्यालयों और विभागों में पिछले तीन वर्षों के दौरान जारी सभी मैनपावर टेंडरों की जांच की जाएगी। विजिलेंस के पुलिस अधीक्षक तीन माह में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ टेंडरों की शर्तें ऐसी रखी गईं, जिनसे कुछ एजेंसियों को लाभ और अन्य योग्य बोलीदाताओं को नुकसान हो सकता है। इनमें ट्राईसिटी यानी चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में पहले से कार्यालय होने की अनिवार्यता शामिल है।

इसके अलावा, अलग-अलग विभागों में अनुभव और टर्नओवर के मानदंडों में अंतर, 'समान सेवाओं' के बजाय 'समान कार्य' की संकीर्ण व्याख्या तथा चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के टेंडर में सात साल के अनुभव की शर्त पर सवाल उठाए गए हैं।

शिकायतों में चंडीगढ़ से ही जारी लेबर लाइसेंस मांगने, परिवहन विभाग के टेंडर में आईएसओ-9001 प्रमाणपत्र अनिवार्य करने और भर्ती एवं चयन के स्पष्ट मानक नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है।

आरोप है कि ऐसी शर्तों से प्रतिस्पर्धा सीमित हो सकती है और अभ्यर्थियों पर अनुचित आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका रहती है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

विजिलेंस ने क्या आदेश दिए?

विजिलेंस विभाग ने पुलिस अधीक्षक (विजिलेंस) को तीन साल के सभी संबंधित टेंडरों की जांच कर तीन माह में रिपोर्ट देने को कहा है।  वित्त सचिव को पत्र लिखकर सामान्य वित्तीय नियमों (जीएफआर) के अनुरूप मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और बिडिंग दस्तावेज 15 दिन के भीतर जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य टेंडर की शर्तों में एकरूपता, पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।

तीन अन्य मामलों में भी जांच

विजिलेंस विभाग ने सरकारी टेंडरों में भ्रष्टाचार की शिकायत पर भी तीन माह में रिपोर्ट मांगी है। ट्यूबवेल ऑपरेटरों के मामले में दो माह में जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है। आरोप था कि कागजों में ऑपरेटरों की संख्या अधिक, जबकि मौके पर कम है। साथ ही, निर्धारित 21,500 रुपये के बजाय 6,000 से 10,000 रुपये वेतन देने का आरोप लगाया गया था।

इसके अतिरिक्त, जैम के आंकड़ों के आधार पर वित्त वर्ष 2024-25 और 2026-27 के डीपी तथा एल-1 मामलों की जांच कर आठ सप्ताह में प्राथमिकता के आधार पर रिपोर्ट मांगी गई है। इन मामलों में भी आरोपों और अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी।