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चंडीगढ़ में अनोखा प्रयास, जंगल में लग रही बच्चों की पाठशाला; तितलियां और परिंदों से सीख रहे प्रकृति का पाठ

Published: Thu, 29 Oct 2026 01:11 PM (IST)

चंडीगढ़ में वन और शिक्षा विभाग मिलकर सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए प्रकृति शिक्षा कार्यक्रम चला रहे हैं। इसमें ...और पढ़ें

चंडीगढ़ प्रशासन ने बच्चों के लिए शुरू किया प्रकृति शिक्षा कार्यक्रम।

चंडीगढ़ प्रशासन ने बच्चों के लिए शुरू किया प्रकृति शिक्षा कार्यक्रम। 

HighLights

  1. सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए प्रकृति शिक्षा कार्यक्रम।

  2. पारिस्थितिकी संतुलन की व्यावहारिक जानकारी।

  3. पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करने का उद्देश्य।


जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। कल्पना कीजिए, जहां ब्लैकबोर्ड की जगह हरे-भरे पेड़ हों, किताबों के पन्नों की जगह तितलियों के रंग और घंटी की आवाज की जगह पक्षियों का कलरव सुनाई दे। चंडीगढ़ में स्कूली बच्चों के लिए पढ़ाई का ऐसा ही अनूठा अनुभव तैयार किया जा रहा है, जहां जंगल और प्राकृतिक वातावरण ही उनकी पाठशाला बन रहे हैं।

सेक्टर-27 स्थित राजकीय माडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के करीब 100 विद्यार्थियों ने सेक्टर-26 के बटरफ्लाई पार्क में प्रकृति को करीब से जाना। तितली विशेषज्ञ कुलभूषण कंवर के मार्गदर्शन में बच्चों ने तितलियों के जीवन चक्र, उनके विकास के विभिन्न चरणों और उन्हें आकर्षित करने वाले पौधों के बारे में जानकारी हासिल की।

उन्हें यह भी बताया गया कि परागण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में तितलियों की अहम भूमिका होती है। यह पहल वन एवं वन्यजीव विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के समन्वय से अक्टूबर-नवंबर 2026 में चलाए जा रहे दो माह के प्रकृति शिक्षा कार्यक्रम का हिस्सा है।

इसके तहत शहर के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को प्राकृतिक स्थलों पर ले जाकर पर्यावरण की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।लेक फारेस्ट ट्रेल पर बच्चे पक्षियों का अवलोकन करते हैं, स्थानीय पेड़-पौधों की पहचान सीखते हैं और समझते हैं कि जंगल में मौजूद जीव-जंतु तथा वनस्पतियां एक-दूसरे पर किस तरह निर्भर हैं।

अनुभव से विकसित होगी संरक्षण की भावना

इस कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण शिक्षा को पाठ्यपुस्तकों से आगे ले जाना है। प्रकृति के बीच बिताया गया समय बच्चों में जिज्ञासा बढ़ाने के साथ जैव विविधता के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित कर सकता है। तितलियों के रंग, पक्षियों की आवाज और पेड़ों की विविधता के माध्यम से बच्चे यह समझ रहे हैं कि प्रकृति का हर हिस्सा महत्वपूर्ण है।


यह पहल बच्चों को केवल पर्यावरण के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि उन्हें प्रकृति को समझने, उससे जुड़ने और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा भी देती है।