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चंडीगढ़ नगर निगम का देख लो हाल, कोई अधिकारी नहीं टिकने को तैयार; काम समझने से पहले ही तबादला

Published: Tue, 27 Oct 2026 07:00 AM (IST)

चंडीगढ़ नगर निगम में संयुक्त आयुक्तों के बार-बार तबादलों से प्रशासनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों के ...और पढ़ें

नगर निगम में अधिकारियों का बार-बार बदलना व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती। (सांकेतिक फोटो)

नगर निगम में अधिकारियों का बार-बार बदलना व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. चंडीगढ़ निगम में संयुक्त आयुक्तों के लगातार तबादले।

  2. अधिकारी काम समझने से पहले ही बदल दिए जाते हैं।

  3. प्रशासनिक कामकाज और शहरवासियों की समस्याओं पर असर।

बलवान करिवाल, चंडीगढ़। नगर निगम में अधिकारियों का बार-बार बदलना अब प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। स्थिति यह है कि कोई अधिकारी पहले तो निगम में ज्वाइन ही नहीं करना चाहता। कोई आता भी है तो उसे कामकाज और विभागीय प्रक्रिया समझने में ही कई महीने लग जाते हैं।

जब तक वह व्यवस्था को समझकर काम में गति लाने की स्थिति में पहुंचता है, तब तक उसके तबादले या मूल कैडर में वापसी की नौबत आ जाती है। इसका सीधा असर नगर निगम के कामकाज और शहरवासियों की समस्याओं के समाधान पर पड़ रहा है। नगर निगम में ज्वाइंट कमिश्नर के पदों को लेकर भी यही स्थिति सामने आ रही है।

डाॅ. इंदर जीत के वापस हरियाणा लौटने के बाद ज्वाॅइंट कमिश्नर का एक पद खाली था। अब प्रशासन ने एचसीएस गौरव कुमार को ज्वाॅइंट कमिश्नर नियुक्त किया है। रिक्त पद भरने से राहत मिलती तो दूसरी ओर करीब एक साल से निगम में कार्यरत हिमांशु गुप्ता को ट्रांसफर कर नई जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। उनके स्थान पर अविकेश गुप्ता को ज्वाइंट कमिश्नर लगाया गया है।

अब तीनों ही ज्वाॅइंट कमिश्नर नए

बलबीर राज सिंह को निगम में आए अभी कुछ ही महीने हुए हैं। गौरव और अविकेश गुप्ता भी निगम में नए अधिकारी हो गए हैं। इस बदलाव के बाद निगम में एक बार फिर अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों के अनुरूप कामकाज समझने और विभागीय व्यवस्था से तालमेल बैठाने की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

ज्वाॅइंट कमिश्नर का पद नगर निगम में महत्वपूर्ण है। अधिकारियों के पास वित्तीय, प्रशासनिक और विभागीय कार्यों से जुड़ी जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे में बार-बार बदलाव होने से फाइलों की निरंतरता, लंबित मामलों की समीक्षा और अधिकारियों के बीच समन्वय प्रभावित हो सकता है।

ज्वाॅइंट कमिश्नर स्तर पर लगातार हलचल

नगर निगम में लंबे समय से अधिकारियों की नियुक्ति, तबादले और मूल कैडर में वापसी का सिलसिला चर्चा में रहा है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन निगम में अधिकारियों की तैनाती के दौरान स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कोई नीति बनाएगा?

शहर में सफाई, सड़क, पानी, अतिक्रमण और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर निगम की जवाबदेही रहती है। ऐसे में अधिकारियों का पर्याप्त समय तक पद पर बने रहना जरूरी है, ताकि योजनाओं की जिम्मेदारी तय हो सके और काम के परिणामों की समीक्षा की जा सके।

ज्वाॅइंट कमिश्नर के पद पर बार-बार बदलाव

नगर निगम के ज्वाॅइंट कमिश्नर पद पर शंभू राठी, शशि वसुंधरा, सुमीत सिहाग, डा. इंदर जीत और रोहित गुप्ता सहित कई अधिकारी अपना कार्यकाल पूरा किए बिना ही वापस लौट गए। कई अधिकारियों ने स्वयं ही वापसी का आवेदन किया था। इस तरह से ज्वाॅइंट कमिश्नर स्तर पर लगातार बदलाव होते रहे हैं।