विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चंडीगढ़ निगम चुनाव की तैयारी, आरक्षण की कैंची से खिसकेगी कई की सियासी जमीन, टिकट की दौड़ में बढ़ी बेचैनी

Published: Sun, 30 Aug 2026 07:05 PM (IST)

चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव से पहले वार्डों के आरक्षण ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। यह बदलाव नए चेहरों और ...और पढ़ें

नगर निगम चुनाव से पहले वार्डों के आरक्षण ने बढ़ाई चिंता।

नगर निगम चुनाव से पहले वार्डों के आरक्षण ने बढ़ाई चिंता।

HighLights

  1. सात पार्षदों की सीट गई तो कई दावेदारों की बढ़ेगी टेंशन।

  2. 35 में से 12 वार्ड महिलाओं, 7 एससी के लिए आरक्षित।

  3. भाजपा-आप को टिकट बंटवारे में नई रणनीति बनानी होगी।

राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। नगर निगम चुनाव से पहले वार्डों के आरक्षण ने शहर की सियासत गरमा दी है। प्रशासन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार 35 वार्डों में से 12 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे, जबकि सात वार्ड अनुसूचित जाति (एससी) के लिए तय किए जाएंगे। ऐसे में कई मौजूदा पार्षदों की अपने वार्ड से चुनाव लड़ने की राह बंद हो सकती है।

एससी वार्डों का निर्धारण वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। वहीं सात में से तीन वार्ड एससी महिलाओं के लिए ड्राॅ से तय होंगे। इसके अलावा नौ सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।

इससे कई पुरुष पार्षदों और टिकट के दावेदारों को नई राजनीतिक जमीन तलाशनी पड़ेगी। आरक्षण को लेकर भाजपा और आप में भी अंदरखाने मंथन शुरू हो गया है। अधिसूचना के अनुसार अनुसूचित जाति के लिए वार्डों का चयन वर्ष 2011 की पिछली प्रकाशित जनगणना में दर्ज अनुसूचित जाति की आबादी के प्रतिशत के आधार पर किया जाएगा।

जिन वार्डों में अनुसूचित जाति की आबादी का प्रतिशत सबसे अधिक होगा, उन्हें आरक्षित करने में प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, वर्ष 2021 के पिछले नगर निगम चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए गए सात वार्डों को इस बार की आरक्षण प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा।

जनसंख्या के आधार पर वार्ड नंबर-1, 3, 4, 9, 15, 29 और 32 आरक्षित होने की संभावना है जहां पर इस समय भाजपा और आम आदमी पार्टी के पार्षद हैं। इनकी घोषणा अगले माह के दूसरे सप्ताह होने वाले ड्रा से पहले कर दी जाएगी।

इन सातों वार्डों में फिलहाल सामान्य वर्ग के पार्षद काबिज हैं। अब इन नेताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की होगी। इनमें से तीन वार्ड आरक्षित वर्ग की महिलाओं के लिए ड्रा से तय किए जाने हैं।

दलीप शर्मा के सामने लगातार तीसरी जीत की राह में रोड़ा

वार्ड-3 से भाजपा के दलीप शर्मा लगातार दो बार पार्षद रह चुके हैं। आरक्षण लागू होने की स्थिति में उनकी लगातार तीसरी बार उसी वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी पर ब्रेक लग सकता है।

पार्टी के भीतर उनकी अगली राजनीतिक भूमिका और नए वार्ड से संभावित दावेदारी को लेकर भी समीकरण बदलेंगे। ऐसे में आरक्षण सिर्फ एक वार्ड की सीमा नहीं बदलेगा, बल्कि पार्टी के भीतर टिकट की गणित को भी प्रभावित करेगा।

इसी तरह वार्ड नंबर-4 की पार्षद सुमन शर्मा ने पिछला चुनाव आम आदमी पार्टी की टिकट पर जीता था, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गईं। अब उनका वार्ड आरक्षित होने से उनकी अगली चुनावी रणनीति भी दिलचस्प हो गई है।

आप और भाजपा दोनों के लिए टिकट बंटवारे की चुनौती

वार्ड नंबर-1 की आप पार्षद जसविंदर कौर, वार्ड-15 के आप पार्षद रामचंद्र यादव और वार्ड-29 के आप पार्षद मनौर की सीट भी आरक्षित होने की स्थिति में बदल जाएगी। ऐसे में वार्ड आरक्षित होने की संभावना से वहीं भाजपा की बिमला दूबे और जसमनप्रीत सिंह को भी नए राजनीतिक विकल्प तलाशने होंगे।

खासकर बिमला दूबे के मामले में पति भाजपा नेता अनिल दूबे की राजनीतिक सक्रियता के कारण आने वाले दिनों में वार्ड बदलने का फैसला स्थानीय भाजपा की राजनीति पर असर डाल सकता है।

कुछ नेताओं का कहना है कि जब नए सिरे से वार्डबंदी हो चुकी है कई वार्ड में से एरिया हट चुके हैं ऐसे में साल 2011 की जनगणना के आधार पर वार्ड तय करने से सटीक जानकारी सामने नहीं आ रही है।

12 वार्डों में महिलाओं की एंट्री, पुरुष दावेदारों की छुट्टी

नगर निगम के 35 वार्डों में कुल 12 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। इनमें नौ वार्ड सामान्य वर्ग की महिलाओं और तीन वार्ड आरक्षित वर्ग की महिलाओं के लिए होंगे। इसका सीधा मतलब है कि 12 वार्डों में पुरुष नेताओं की चुनावी दावेदारी समाप्त हो जाएगी। कई नेता जिन वार्डों में लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें अब अपनी रणनीति बदलनी पड़ेगी।

जानें क्या कहते हैं राजनीतिक विशेषज्ञ

पंजाब विश्वविद्यालय के राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर भारत का कहना है कि  वार्डों का आरक्षण नगर निगम चुनाव में महज सीटों का पुनर्गठन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को अधिक व्यापक और समावेशी बनाने का अवसर है।

महिलाओं और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वार्डों से नए चेहरों, नई नेतृत्व क्षमता और समाज के विभिन्न वर्गों की राजनीतिक भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा।

स्वाभाविक रूप से आरक्षण से कुछ मौजूदा पार्षदों के राजनीतिक समीकरण बदलेंगे, लेकिन लोकतंत्र में व्यक्ति से अधिक महत्वपूर्ण व्यवस्था और व्यापक प्रतिनिधित्व होता है।

राजनीतिक दलों के लिए यह चुनौती के साथ-साथ अवसर भी है जिससे वे नए नेतृत्व को आगे बढ़ाएं, सामाजिक विविधता को अपने राजनीतिक संगठन में बेहतर प्रतिनिधित्व दें और बदलते समीकरणों के अनुरूप अपनी रणनीति तैयार करें।