सड़कें बनीं झील, पानी में डूबीं गाड़ियां...देश-दुनिया ने देखा चंडीगढ़ का हाल, अब निगम ने खड़े किए हाथ
चंडीगढ़ में भारी बारिश से हुए जलभराव और गाड़ियां डूबने के बाद नगर निगम ने व्यवस्था से एक तरह से ...और पढ़ें

तस्वीर 18 अगस्त की है, जब मूसलाधार वर्षा के चलते चंडीगढ़ की सड़कों पर जलभराव हुआ था।
HighLights
चंडीगढ़ में भारी बारिश से जलभराव, सड़कें धंसने की समस्या।
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
ड्रेनेज रखरखाव निजी एजेंसियों को आउटसोर्स पर करने की तैयारी।
बलवान करिवाल, चंडीगढ़। 18 अगस्त को हुई तेज बारिश के बाद चंडीगढ़ की सड़कों पर दो से तीन फीट पानी जमा हुआ। गाड़ियां पानी में डूबी और पूरी दुनिया ने इंटरनेट मीडिया, टीवी चैनलों पर देश के पहले प्लान्ड सिटी का यह हाल देखा।
जगह-जगह जलभराव, सड़कों के धंसने और ड्रेनेज व्यवस्था की बदहाली ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। अब निगम पहली बार शहर की सीवर और ड्रेनेज पाइपलाइनों के वार्षिक रखरखाव का काम निजी एजेंसियों को आउटसोर्स करने की तैयारी कर रहा है।
इसके तहत एजेंसियां पूरे साल पाइपलाइन की सफाई, गाद निकालने, मरम्मत और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी संभालेंगी। चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा ने निगम सदन की बैठक में जानकारी देते हुए बताया कि लाइन वाइज एरिया वार्षिक रेट तय कर दिया जाएगा।
निगम कमिश्नर अमित कुमार ने सदन में कहा था कि अभी कोई पाइपलाइन टूटती है तो टेंडर लगने और दूसरी प्रक्रिया में समय लगता है। नई व्यवस्था में एनुअल काॅन्ट्रेक्ट होने के बाद तुरंत काॅन्ट्रेक्टर काम शुरू करेगा।
कई जगह ड्रेनेज धंसने से सड़क धंसी
बारिश के दौरान शहर के कई प्रमुख मार्गों और सेक्टरों में घंटों पानी जमा रहा। सेक्टर-6, 28 सहित कई स्थानों पर सड़कें धंसने की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई।
जलभराव के बाद मेयर सौरभ जोशी ने अधिकारियों पर शहर का जायजा लेने तक नहीं निकलने के आरोप लगाए थे। निगम सदन में भी उन्होंने पब्लिक हेल्थ विंग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई थी।
मेयर का कहना था कि विभाग अधिकांश मामलों में केवल मैनहोल चैंबर से गाद निकालकर सफाई का दावा करता है, जबकि पाइपलाइन के भीतर जमा सिल्ट और अवरोधों की नियमित सफाई नहीं की जाती। इसी कारण बरसात के समय पानी निकासी व्यवस्था प्रभावित होती है और जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
सुपर सक्शन मशीन तक काॅन्ट्रेक्टर की जिम्मेदारी
नई प्रस्तावित व्यवस्था में निजी एजेंसियों को आधुनिक मशीनरी के साथ काम करना होगा। इसमें सुपर सक्शन मशीन और रोबोटिक सीवरेज क्लीनिंग तकनीक का इस्तेमाल भी शामिल रहेगा।
एजेंसी पाइपलाइन के भीतर की स्थिति का निरीक्षण कर जाम, गाद और अन्य अवरोधों को दूर करेगी। साथ ही क्षतिग्रस्त हिस्सों की पहचान कर आवश्यक मरम्मत भी करेगी। अभी निगम के पास कोई सुपर सक्शन मशीन है ही नहीं।
मानसून से पहले ही होगी तैयारी
निगम का मानना है कि वार्षिक रखरखाव व्यवस्था लागू होने से बारिश से पहले ही पाइपलाइन नेटवर्क की सफाई और तैयारी हो सकेगी। इससे आपात स्थिति में केवल शिकायत आधारित कार्रवाई करने के बजाय नियमित निगरानी संभव होगी।
हालांकि इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि जब पाइपलाइन की सफाई, रखरखाव और मरम्मत का अधिकांश काम निजी एजेंसियों को दे दिया जाएगा तो नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग और खासकर पब्लिक हेल्थ विंग की भूमिका क्या रह जाएगी।
अब पब्लिक हेल्थ विंग की जिम्मेदारी सीधे सफाई करने के बजाय तकनीकी निगरानी, गुणवत्ता जांच और एजेंसियों की जवाबदेही तय करने तक सीमित हो सकती है। ऐसे में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि निगम निजी एजेंसियों के काम की प्रभावी मानिटरिंग करे, ताकि आउटसोर्सिंग के बावजूद शहर को हर बारिश में जलभराव की समस्या का सामना न करना पड़े।
रिपोर्ट बलवान करिवाल
