ASI को घर के बाहर खड़े पेड़ की करानी छंटाई, चंडीगढ़ निगम में कोई सुनता ही नहीं; डेढ़ महीने से काट रहे चक्कर
पंजाब पुलिस के एक एएसआई को चंडीगढ़ नगर निगम से अपने घर के बाहर पेड़ की छंटाई कराने के लिए ...और पढ़ें

पीपल के पेड़ की छंटाई के लिए पंजाब पुलिस के एएसआई कृष्ण सहाय को लगाने पड़ रहे चक्कर।
HighLights
एएसआई कृष्ण सहाय डेढ़ महीने से छंटाई के लिए परेशान।
चंडीगढ़ नगर निगम ने शिकायत पर नहीं की कार्रवाई।
मेयर के निर्देश के बावजूद अधिकारी टालमटोल करते रहे।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। नगर निगम चंडीगढ़ में शिकायत दर्ज कराना आसान है, लेकिन समाधान के लिए लोगों को चक्कर काटने पड़ते हैं। काम हो या न हो, शिकायत हल होने का मैसेज आ जाता है।
दोबारा फोन करने पर कभी मशीन खराब होने की बात कही जाती है, तो कभी जल्द काम कराने का आश्वासन मिलता है। इसके बाद फोन व्यस्त या बंद आता है। ऐसे में सवाल उठता है कि शिकायत नंबर, ऐप और व्हाट्सएप जारी करने का क्या फायदा, जब लोगों की समस्या दूर ही न हो?
सेक्टर-20बी में पीपल के पेड़ की छंटाई के लिए पंजाब पुलिस में तैनात एएसआई कृष्ण सहाय करीब डेढ़ महीने से निगम के चक्कर लगा रहे हैं। पेड़ की शाखाएं उनके मकान नंबर-1354 के अंदर तक आ रही हैं, लेकिन शिकायत के बावजूद छंटाई के लिए कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा।
कृष्ण सहाय के मुताबिक, वह सितंबर की शुरुआत से निगम के चक्कर लगा रहे हैं। पहली शिकायत के बाद फोन पर मकान नंबर और अन्य जानकारी लेकर जल्द काम कराने को कहा गया। कई दिन बीतने पर भी कोई नहीं आया। फोन पर फिर आश्वासन मिला, लेकिन बाद में नंबर व्यस्त या बंद आता रहा।
निगम कमिश्नर से भी लगा चुके गुहार
30 सितंबर को वह नगर निगम कमिश्नर से मिलने पहुंचे। कमिश्नर के उपलब्ध नहीं होने पर उनके पीए ने कृष्ण सहाय को दूसरे अधिकारी के पास भेजा। वहां भी काम कराने का भरोसा मिला, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
कई दिन बाद वह दोबारा पीए के पास गए, जिन्होंने अधिकारी से बात की। अधिकारी ने मशीन खराब होने की बात कही। कृष्ण सहाय ने सवाल किया कि मशीन खराब थी तो उनके घर के पास दूसरी जगह छंटाई कैसे हुई?
मेयर के सामने भी दुखड़ा रो चुके
शुक्रवार को कृष्ण सहाय मेयर सौरभ जोशी के पास पहुंचे। मेयर ने संबंधित अधिकारी को फोन कर शिकायत का निपटारा करने के निर्देश दिए। उनके कहने पर कृष्ण सहाय अधिकारी से मिलने गए, लेकिन कर्मचारी ने बताया कि अधिकारी कमरे में नहीं हैं।
कृष्ण सहाय ने पूछा कि फिर उन्हें मिलने के लिए क्यों बुलाया गया। उन्होंने दोबारा मेयर के पीए को इसकी जानकारी दी तो पीए ने फोन कर जवाब मांगा। इसके बाद अधिकारी ने जल्द छंटाई कराने का आश्वासन दिया।
कृष्ण सहाय ने सवाल उठाया कि एक सामान्य शिकायत पर कार्रवाई के लिए मेयर के हस्तक्षेप की जरूरत क्यों पड़ी और कमिश्नर कार्यालय तक बात पहुंचने के बाद भी अधिकारी सक्रिय क्यों नहीं हुए। ऐसी अपारदर्शिता भ्रष्टाचार की आशंकाओं को भी जन्म देती है।
