पुलिस शिकायत और कोर्ट में दिए बयानों में अंतर, दुष्कर्म केस में चंडीगढ़ निवासी युवक सभी आरोपों से बरी
चंडीगढ़ जिला अदालत ने दुष्कर्म के आरोपों से युवक को बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से ...और पढ़ें

चंडीगढ़ जिला अदालत ने सुनाया फैसला।
HighLights
शिकायत में नशा देने का आरोप था, कोर्ट में कहा कि होश में थी।
अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सुनाया फैसला।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। जिला अदालत ने दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार 22 वर्षीय बिपनप्रीत को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपित के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
युवती की ओर से पुलिस को दी शिकायत और कोर्ट में दिए बयानों में अंतर मिला। सेक्टर-49 थाना पुलिस ने बीएनएस की धारा 64 और 123 के तहत उसके खिलाफ केस दर्ज किया था। शिकायतकर्ता की आरोपित से स्नैपचैट के जरिए जान-पहचान हुई थी।
एक अगस्त 2024 को दोनों सेक्टर-32 स्थित एसडी काॅलेज के सामने मिले और लाॅन्ग ड्राइव पर गए। वहां बीयर का सेवन करने के बाद आरोपित के फ्लैट पर पहुंचे, जहां आरोपित ने दुष्कर्म किया।
युवती ने अपनी सह को फोन किया, जो कपड़े लेकर आई। उसने अपनी मां को घटना की जानकारी दी और अगले दिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया।
आरोपित की ओर से अधिवक्ता मनदीप कुमार और कशिश जैन ने शिकायत और अदालत में दिए बयान में अंतर को महत्वपूर्ण बताया। बचाव पक्ष ने कहा कि शिकायत में नशा देने का आरोप था, जबकि अदालत में शिकायतकर्ता ने कहा कि वह होश में थी और उसने विरोध किया।
अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर पाया
बचाव पक्ष ने फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कपड़ों और शरीर के नमूनों में वीर्य के निशान नहीं मिले। शिकायतकर्ता ने परामर्श के दौरान पहले भाई को घटना की जानकारी देने की बात कही, जबकि पुलिस शिकायत में मां को सबसे पहले बताने का उल्लेख था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अभियोजन को आरोप साबित करने में असफल माना और बिपनप्रीत को बरी कर दिया।
