चंडीगढ़ में लीज होल्ड प्राॅपर्टी को फ्री होल्ड कराने का रास्ता होगा आसान, 50 प्रतिशत कलेक्टर रेट का प्रस्ताव
चंडीगढ़ में लीजहोल्ड औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने का रास्ता आसान होने वाला है। प्रशासन ने मौजूदा कलेक्टर ...और पढ़ें

चंडीगढ़ में वर्षों से लीजहोल्ड व्यवस्था में चल रही औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियां हो सकती हैं फ्री होल्ड। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
चंडीगढ़ प्रशासन ने गृह मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव।
व्यावसायिक संपत्ति मालिकों को मिल सकती राहत।
करीब 15,016 औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियां।
राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। शहर में वर्षों से लीजहोल्ड व्यवस्था में चल रही औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियों को फ्रीहोल्ड कराने का रास्ता आसान हो सकता है। प्रशासन ने मौजूदा कलेक्टर रेट के आधार पर करीब 50 प्रतिशत कन्वर्जन चार्ज तय करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
सर्वे और वित्तीय आकलन के बाद यह प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो बड़ी संख्या में संपत्ति मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन के रिकाॅर्ड के अनुसार चंडीगढ़ में करीब 15,016 औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियां हैं। इनमें लगभग 8,600 संपत्तियां लीजहोल्ड हैं। प्रशासन का मानना है कि फ्रीहोल्ड होने से इन संपत्तियों के मालिकों को संपत्ति के हस्तांतरण और उपयोग में अधिक सुविधा मिल सकेगी, वहीं प्रशासन को भी कन्वर्जन शुल्क के रूप में राजस्व प्राप्त होगा।
पांच मरला के लिए 51.9 लाख रुपये
प्रस्तावित दर के अनुसार 125 वर्ग गज यानी पांच मरला औद्योगिक प्लाॅट के लिए करीब 51.9 लाख रुपये कन्वर्जन चार्ज प्रस्तावित है। 254.69 वर्ग गज के लिए 1.05 करोड़, 375 वर्ग गज के लिए 1.5 करोड़, 528.13 वर्ग गज यानी एक कनाल के लिए 2.1 करोड़ और 1006 वर्ग गज यानी दो कनाल के लिए करीब 4.1 करोड़ रुपये शुल्क बनता है।
व्यावसायिक संपत्तियों में सेक्टर-22ए के 287.5 वर्ग गज एससीओ के लिए करीब 6.4 करोड़ रुपये, सेक्टर-31सी की 50.19 वर्ग गज बूथ के लिए 74.7 लाख और सेक्टर-30सी के 114 वर्ग गज एससीएफ के लिए 2.5 करोड़ रुपये कन्वर्जन शुल्क प्रस्तावित किया गया है।
नीलामी वाली संपत्तियों के लिए 25 प्रतिशत
नीलामी के माध्यम से आवंटित प्लाॅट्स और संपत्तियों के लिए प्रशासन ने लागू कलेक्टर रेट के 25 प्रतिशत की दर से कन्वर्जन शुल्क प्रस्तावित किया है। शुल्क एकमुश्त जमा करने के साथ किस्तों में भुगतान का विकल्प भी रखा गया है।
इन शर्तों को करना होगा पूरा
फ्रीहोल्ड कन्वर्जन के लिए संपत्ति पर निर्माण पूरा होना, बकाया ग्राउंड रेंट जमा होना और अन्य कोई बकाया नहीं होना जरूरी होगा। साथ ही संपत्ति पर भवन नियमों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। प्रस्तावित व्यवस्था में कन्वर्जन शुल्क की गणना औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों के अलग-अलग कलेक्टर रेट के आधार पर की गई है।
लीज होल्ड के कारण ही प्रशासन अपनी कमर्शियल प्राॅपर्टी नहीं बेच पा रहा
धनास की दस दुकानों को नीलाम करने का तीन बार नोटिस निकल चुका है, लेकिन हर बार यह नीलामी असफल नहीं है। प्रशासन ने दुकानों के रेट भी कम कर दिए फिर भी नीलामी के लिए कोई भी बिड नहीं आई।
प्रशासन ने पिछले साल सात कमर्शियल साइट की नीलामी निकाली थी, जिसमें सिर्फ दो ही साइट नीलाम हुई। इनमें से एक बोलीदाता ने खरीदी हुई साइट को सरेंडर कर दिया है। अग्रिम राशि जमा न होने से इनकी बोली खारिज कर दी गई है।
प्रशासन, नगर निगम, हाउसिंग बोर्ड और संपदा विभाग की शहर में कई कमर्शियल प्राॅपर्टी है जिसकी नीलामी नहीं हो रही है। सेक्टर-17 में ओवरब्रिज के नीचे बनी 40 दुकानें लीज होल्ड के कारण पिछले 13 साल से बिक नहीं रही हैं।
शहर में कमर्शियल प्राॅपर्टी पर ढाई प्रतिशत लीज मनी चार्ज किया जाता है। प्रशासन के अनुसार अगर प्राॅपर्टी फ्री होल्ड हो जाए तो सभी कमर्शियल प्रापर्टी बिक जाएगी और प्रशासन को भी अच्छा खासा राजस्व इकट्ठा होगा।
प्रशासन को होगा तीन हजार करोड़ का राजस्व इकट्ठा
ज्वाइंट फोरम ऑफ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अनुसार अगर गृह मंत्रालय मंजूरी दे देता है तो इंडस्ट्रियल और कमर्शियल प्राॅपर्टी को फ्री होल्ड करके तीन हजार करोड़ से ज्यादा का राजस्व इकट्ठा कर सकता है जिसका सलाना ब्याज ही 200 करोड़ रुपये बनता है।
फ्री होल्ड प्राॅपर्टी अगर आगे बेची जाती है तो उसकी पांच फीसद स्टांप ड्यूटी भी प्रशासन को मिला करेगी। उद्योगपति प्रशासन की ओर से तय की गई फीस का भुगतान करने के लिए तैयार हैं। इंस्ट्रियल एरिया में इस समय साल में 10 लाख रुपये की लीज मनी इकट्ठी हो रही है।
