चंडीगढ़ में दोषी के अच्छे आचरण पर रहम, 6 साल कोर्ट आया, अपराध नहीं दोहराया; जज बोले- सुधरने का मौका मिले
चंडीगढ़ में एक दोषी को अच्छे आचरण के कारण जज ने बड़ी राहत दी है। हेरोइन बरामदगी के मामले में ...और पढ़ें

चंडीगढ़ स्पेशल कोर्ट का फैसला। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
दोषी को अच्छे आचरण के कारण जज ने राहत दी।
छह साल तक कोई अपराध न करने पर सजा में छूट।
कोर्ट ने जेल में बिताई अवधि को ही पूरी सजा माना।
रवि अटवाल, चंडीगढ़। चंडीगढ़ में नशे के मामले में एक दोषी को अच्छे आचरण की वजह से बड़ी राहत मिली है। जज ने रहम दिखाते हुए दोषी को दोबारा जेल भेजने के बजाय जमानत से पहले जेल में बिताई गई अवधि को ही उसकी पूरी सजा मानकर छोड़ दिया।
स्पेशल कोर्ट के जज रमन गोखलेनी ने दोषी के पिछले छह साल के आचरण और समाज की मुख्यधारा में लौटने के प्रयासों को राहत का आधार बनाया। साथ ही कहा कि एक गलती के बाद कोई व्यक्ति खुद को सुधार ले और छह साल तक अपराध से दूर रहे तो उसे जिंदगी भर उस गलती का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
मामला वर्ष 2020 का है, जब सेक्टर-17 थाना पुलिस ने सेक्टर-23 निवासी अबिनाश को 54 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में अदालत ने उसे दोषी करार दिया।
सजा के समय दोषी ने अदालत को बताया कि वह अविवाहित है और सरकारी नौकरी हासिल करना चाहता है। उसका कहना था कि अगर उसे सजा हुई तो उसका भविष्य खराब हो जाएगा।
छह से रेगुलर कोर्ट आया
अदालत ने कहा कि केस दर्ज होने के बाद से अबिनाश किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं हुआ। वह लगातार अदालत में पेश होता रहा और वह कभी पेशी से गैरहाजिर नहीं हुआ। इस दौरान उसने ईमानदारी से काम किया और खुद को सुधारने के प्रयास किए। ऐसा कोई साक्ष्य भी नहीं है, जिससे उसके नशीले पदार्थों की बिक्री, सप्लाई या तस्करी में शामिल होने का पता चले।
कम उम्र में हुई चूक
जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह घटना कम उम्र में हुई एक चूक थी। केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति को आदतन अपराधी या कठोर आपराधिक प्रवृत्ति वाला नहीं माना जा सकता।
आपराधिक न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को सुधारकर समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह दोषसिद्धि अपने आप में अबिनाश के लिए भविष्य में रोजगार हासिल करने की स्थायी बाधा नहीं बनेगी।
