क्या चंडीगढ़ में अज्ञात शवों की पहचान और अंतिम संस्कार में देरी हो रही? हाईकोर्ट का प्रशासन को नोटिस
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में लावारिस और अज्ञात शवों की पहचान व अंतिम संस्कार में कथित देरी पर ...और पढ़ें

अज्ञात शवों की पहचान व अंतिम संस्कार में देरी के मामले में हाईकोर्ट 30 नवंबर को करेगा सुनवाई। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
हाईकोर्ट ने अज्ञात शवों की पहचान में देरी पर प्रशासन को नोटिस दिया।
याचिकाकर्ता ने पहचान, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार प्रक्रिया तेज करने की मांग की।
यूटी प्रशासन को जवाब दाखिल करने के लिए 30 नवंबर तक का समय मिला।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। चंडीगढ़ में लावारिस और अज्ञात शवों की पहचान तथा उनके सम्मानजनक अंतिम संस्कार में कथित देरी को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी किया है।
जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने यूटी प्रशासन को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।
याचिकाकर्ता एचसी अरोड़ा ने जनहित याचिका दायर कर मांग की है कि अज्ञात शवों की पहचान के लिए समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित करने की प्रक्रिया को तेज किया जाए। उनका कहना है कि पहचान और उसके बाद शव का पोस्टमार्टम, अंतिम संस्कार तथा अस्थियों का विसर्जन जल्द पूरा होना चाहिए।
याचिकाकर्ता के अनुसार, समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित करने में अधिक समय लगने के कारण शवों के सड़ने और दुर्गंध फैलने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने इसे शवों के प्रति सम्मान और गरिमा से जुड़ा विषय बताते हुए अदालत से आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन और चंडीगढ़ पुलिस की ओर से अधिवक्ता हिमांशु मलिक ने अदालत को बताया कि अज्ञात शवों की पहचान और सम्मानजनक तरीके से उनके निस्तारण के लिए पहले ही विस्तृत व्यवस्था तैयार की जा चुकी है।
पुलिस की ओर से अदालत में रखे गए स्थायी आदेश में लापता व्यक्तियों, बच्चों और अज्ञात शवों से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई का प्रविधान है। पीठ ने यूटी प्रशासन को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय देते हुए मामले को 30 नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
