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    चंडीगढ़ में कचरे का पहाड़ 8 माह में भी नहीं उठा, तीसरी डेडलाइन भी खत्म, निगम पर उठे सवाल, CBI जांच की मांग तेज

    By Sohan Lal Edited By: Sohan Lal
    Updated: Sat, 29 Nov 2025 12:08 PM (IST)

    चंडीगढ़ के डंपिंग ग्राउंड में कचरे के पहाड़ को हटाने का काम तीसरी डेडलाइन के बाद भी अधूरा है। बिना टेंडर के शुरू हुए बायो-माइनिंग प्रोजेक्ट की धीमी प्रगति से शहर में गंदगी बढ़ रही है। पीएसयू द्वारा प्राइवेट कंपनियों को काम देने से पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई है।

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    कचरे के पहाड़ से स्मार्टसिटी में गंदगी, बदबू और पर्यावरणीय खतरे बढ़ते जा रहे हैं। 

    राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। शहर के डंपिंग ग्राउंड में जमा कचरे के पहाड़ को हटाने का काम लगातार लटकता जा रहा है। नगर निगम के दावों और बैठकों के बीच 30 नवंबर को तीसरी डेडलाइन भी समाप्त हो जाएगी, लेकिन हालात ज्यों के त्यों हैं।

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    मार्च में जिस बायो-माइनिंग प्रोजेक्ट को अर्जेंट वर्क बताते हुए बिना टेंडर के दो पब्लिक सेक्टर यूनिट्स (पीएसयू) को सौंपा गया था, वह आठ माह बाद भी अपने लक्ष्य का आधा भी पूरा नहीं कर पाया है।

    नगर निगम के अफसरों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों का हवाला देकर इस काम को अत्यंत जरूरी बताते हुए भारी लागत पर दो पीएसयू को अलॉट किया था। चीफ इंजीनियर ने दावा किया था कि मई माह के अंत तक डेढ़ लाख टन कचरा हटाकर डंपिंग ग्राउंड का बड़ा हिस्सा साफ कर दिया जाएगा। यह भी कहा गया था कि पीएसयू के पास विशेषज्ञता और मशीनरी दोनों उपलब्ध हैं।

    लेकिन जमीनी हकीकत उन दावों से बिल्कुल उलट है। आठ महीने बीत गए और कुल कचरे का आधा हिस्सा भी नहीं उठाया गया। इससे शहर में गंदगी, बदबू और पर्यावरणीय खतरे बढ़ते जा रहे हैं। स्थानीय लोग रोजाना शिकायत कर रहे हैं कि डंपिंग ग्राउंड के आसपास रहना मुश्किल हो चुका है।

    सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ है कि जिस काम को अर्जेंट बताकर बिना किसी निविदा प्रक्रिया के पीएसयू को दिया गया, उन्होंने उसे खुद करने की बजाय प्राइवेट कंपनियों को सबलेट कर दिया। इससे पारदर्शिता और काम की गुणवत्ता दोनों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

    विपक्षी दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने अब इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई है। आरोप है कि निगम अधिकारियों ने जल्दबाज़ी और महंगे रेट्स पर काम अलॉट करके नियमों का उल्लंघन किया, जबकि नतीजे शून्य रहे।

    तीसरी डेडलाइन खत्म होने के साथ ही नगर निगम पर दबाव बढ़ गया है कि वह काम की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे और जिम्मेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि शहर को कचरे के इस पहाड़ से जल्द राहत मिल सके।