16 के अस्पताल से GMCH और फिर PGI, एंडोस्कोपी जांच के लिए मरीजों को कटवाए जा रहे चक्कर; ऐसा है चंडीगढ़ का हाल
चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में एंडोस्कोपी जांच की सुविधा ठप होने से मरीज परेशान हैं। जीएमएसएच-16 में चार साल से ...और पढ़ें

एंडोस्कोपी जांच के लिए भटक रहे मरीज। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
जीएमएसएच-16 में एंडोस्कोपी मशीन 4 साल से अनुपयोगी।
जीएमसीएच-32 में दो माह से एंडोस्कोपी सुविधा ठप।
मरीज हो रहे परेशान, पीजीआई पर भी बढ़ रहा बोझ।
मोहित पांडेय, चंडीगढ़। चौबे गए थे छब्बे बनने, दुबे बनकर लौटे... यह कहावत चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में एंडोस्कोपी जांच के लिए भटक रहे मरीजों पर सटीक बैठ रही है। पेट दर्द, लगातार उल्टी, खून की उल्टी या आंतों से जुड़ी परेशानी लेकर मरीज जीएमएसएच-16 पहुंचते हैं तो यहां जांच की सुविधा करीब चार साल से बंद है।
अस्पताल मरीजों को एंडोस्कोपी के लिए जीएमसीएच-32 रेफर कर देता है। लेकिन 32 पहुंचने पर भी मरीज की परेशानी खत्म नहीं होती। यहां भी करीब दो माह से एंडोस्कोपी की सुविधा ठप है। ऐसे में 16 से 32 और 32 से पीजीआइ तक मरीजों को रेफर किए जाने का सिलसिला चल रहा है।
यानी जिस अस्पताल में मरीज और तीमारदार एंडोस्कोपी की उम्मीद लेकर पहुंच रहे है, वहां मशीन बंद है और जिस दूसरे अस्पताल में उसे भेजा जा रहा है, वहां भी जांच नहीं हो रही। इसका सीधा असर मरीज और उनके तीमारदारों पर पड़ रहा है।
सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं मिलने से उन्हें पीजीआई का रुख करना पड़ रहा है। जीएमएसएच-16 की एंडोस्कोपी मशीन के संबंध में ऑडिट रिपोर्ट ने अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार मशीन से आखिरी जांच 13 दिसंबर 2021 को हुई थी।
इसके बाद से मशीन का इस्तेमाल नहीं हुआ। करीब चार साल से मशीन अस्पताल में पड़ी है, लेकिन मरीजों के काम नहीं आ रही। रिपोर्ट के अनुसार मशीन के संचालन के लिए जरूरी स्टाफ उपलब्ध नहीं है।
संबंधित स्टाफ में कोई दूसरे अस्पताल में तैनात हो गया तो कोई सेवानिवृत्त हो गया। इसके बाद मशीन चलाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। नतीजा यह रहा कि जांच की सुविधा होते हुए भी मरीजों को रेफर किया जाता रहा।
एक के बाद दूसरा अस्पताल, आखिर मरीज जाए तो जाए कहां
एंडोस्कोपी जैसी जरूरी जांच के लिए मरीज पहले जीएमएसएच-16 पहुंचता है। वहां से जीएमसीएच-32 भेजा जाता है और 32 में सुविधा बंद होने पर पीजीआई की राह दिखाई जाती है।
अस्पतालों के बीच रेफर होने की इस व्यवस्था में सबसे ज्यादा परेशानी मरीज और उसके तीमारदार को उठानी पड़ रही है। वहीं, लगातार रेफरल के कारण पीजीआई पर भी ऐसे मरीजों का अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। पीजीआई में पहुंच कर रहा मरीजों को एंडोस्कोपी करवाने के लिए तारीख लेने पड़ रही है, जिसकी तारीख महीनों बाद की मिल रही है।
एंडोस्कोपी मशीन खराब होने के चलते ठीक होने के लिए भेजी गई थी, जल्द ही यह मशीन ठीक हो जाएगी, जिस मरीजों को जांच के लिए अन्य पीजीआई रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। -डा. सुमित सिंह, विभागाध्यक्ष, गैस्ट्रोएंटरोलाजी विभाग, जीएमसीएच-32
