चंडीगढ़ मेयर चुनाव की प्रक्रिया में धांधली की आशंका, याचिका को हाईकोर्ट ने बताया ‘पब्लिसिटी स्टंट’
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में धांधली की आशंका जताने वाली योगेश ढींगरा की याचिका को ...और पढ़ें

29 जनवरी को होने हैं चंडीगढ़ में मेयर चुनाव। ऑब्जर्वर नियुक्त करने और अतिरिक्त निगरानी की मांग की गई थी।
HighLights
योगेश ढिंगरा ने दायर की थी याचिका।
ऑब्जर्वर नियुक्त करने और अतिरिक्त निगरानी की मांग।
अदालत ने आशंकाओं पर आदेश देने से इनकार किया।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 29 जनवरी को होने वाले चंडीगढ़ मेयर चुनाव में को लेकर दायर याचिका पर तीखी टिप्पणियां करते हुए साफ कर दिया कि अदालत केवल आशंकाओं के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं करेगी। याचिकाकर्ता योगेश ढींगरा द्वारा चुनाव प्रक्रिया में संभावित धांधली की आशंका जताते हुए ऑब्जर्वर नियुक्त करने और अतिरिक्त निगरानी की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सबसे पहले याचिका की मंशा पर ही सवाल उठा दिए। कोर्ट ने कहा कि जिस कक्ष में चुनाव होना है, वहां पहले से ही सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। ऐसे में अतिरिक्त निगरानी या ऑब्जर्वर की मांग का औचित्य क्या है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में टिप्पणी की कि यह याचिका किसी ठोस तथ्य या प्रमाण पर आधारित नहीं है, बल्कि केवल राजनीतिक मंशा और प्रचार पाने के उद्देश्य से दायर की गई प्रतीत होती है।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि चुनाव में धांधली हो सकती है। अदालत ने कहा कि इस बार चुनाव हाथ उठाकर होने हैं, ऐसे में धांधली की संभावना कैसे बनती है, यह याचिकाकर्ता स्पष्ट नहीं कर सका। कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि आपके आदेशों पर हम आदेश जारी नहीं करेंगे, जिससे अदालत का रुख पूरी तरह स्पष्ट हो गया।
मामले की गंभीरता को परखते हुए हाईकोर्ट ने एक असाधारण सुझाव भी दिया। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता अब भी ऑब्जर्वर नियुक्त करने पर अड़ा है, तो वह अपनी जेब से पांच लाख रुपये जमा करे।
इसके बाद अदालत ने कहा कि वह अदालत में मौजूद किसी भी वकील को चुनाव के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त कर देगी। इस प्रस्ताव पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को पांच मिनट का समय दिया और निर्देश दिया कि वह अपने मुवक्किल से पूछकर बताए कि क्या वह पांच लाख रुपये जमा करने को तैयार है।
इसके बाद सुनवाई को पांच मिनट के लिए स्थगित किया गया। तय समय के बाद जब सुनवाई फिर शुरू हुई, तो याचिकाकर्ता की ओर से एक बार फिर केवल आशंका जताई गई कि चुनाव में गड़बड़ी हो सकती है।
इस पर चंडीगढ़ नगर निगम की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुसार कराए जाएंगे। नगर निगम के इस स्पष्ट आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने याचिका में किसी तरह का दम न पाते हुए उसका निपटारा कर दिया।
