महज 5 रुपये के ई-स्टांप पर 319 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क, चंडीगढ़ में ई-स्टांपिंग के नाम पर जनता से लूट
चंडीगढ़ में महज 5 रुपये के ई-स्टांप पर 319% अतिरिक्त शुल्क वसूलने का मामला सामने आया है, जिस पर एडवोकेट ...और पढ़ें
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अजय जग्गा ने अतिरिक्त शुल्कों की कानूनी समीक्षा की मांग की।
HighLights
चंडीगढ़ में 5 रुपये के ई-स्टांप पर 319% अतिरिक्त शुल्क
एडवोकेट अजय जग्गा ने यूटी प्रशासक से कानूनी समीक्षा की मांग की
पंजाब स्टांप नियमों का उल्लंघन, संपर्क केंद्रों की भूमिका पर सवाल
राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। चंडीगढ़ के संपर्क केंद्रों पर महज पांच रुपये के ई-स्टांप पेपर के लिए नागरिक से 20.97 रुपये लिए जाने के मामले में एडवोकेट और यूटी प्रशासक की एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य अजय जग्गा ने सवाल उठाए हैं।
उन्होंने यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र भेजकर इन अतिरिक्त शुल्कों की कानूनी वैधता की समीक्षा करने की मांग की है। जग्गा के अनुसार, पांच रुपये के स्टांप पेपर के मूल्य के अलावा 2.66 रुपये आवेदन फार्म शुल्क और 13.31 रुपये सुविधा शुल्क लिया जा रहा है।
इस तरह नागरिक को कुल 20.97 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। यानी पांच रुपये के स्टांप मूल्य के मुकाबले 15.97 रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं, जो स्टांप की मूल कीमत का करीब 319.40 प्रतिशत है।
उन्होंने प्रशासक से पूछा है कि क्या स्टांप के वास्तविक मूल्य से अधिक राशि वसूलने की अनुमति कानून देता है। उनका कहना है कि यह मामला केवल छोटी राशि की अतिरिक्त वसूली का नहीं, बल्कि सार्वजनिक नीति, पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही से भी जुड़ा है।
पंजाब स्टांप नियमों का दिया हवाला
जग्गा ने अपने पत्र में पंजाब स्टांप रूल्स, 1934 के नियम 28 का हवाला देते हुए कहा है कि चंडीगढ़ में लागू इन नियमों के तहत लाइसेंस प्राप्त स्टांप विक्रेता किसी स्टांप के लिए उसके मूल्य से अधिक राशि मांग या स्वीकार नहीं कर सकता।
नियमों में स्टांप विक्रेता को सरकार द्वारा अधिकृत छूट के माध्यम से पारिश्रमिक दिए जाने का भी प्रावधान है। उन्होंने नियम 28(7) का उल्लेख करते हुए कहा कि विक्रेता किसी व्यक्ति को लाइसेंस में अनुमत मूल्य के स्टांप बेचने के लिए बाध्य है और स्टांप के मूल्य से अधिक राशि स्वीकार नहीं कर सकता।
इसके अलावा नियम 34(3) के तहत गैर-न्यायिक स्टांप की बिक्री पर लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं को निर्धारित दर से कमीशन अथवा छूट दिए जाने के प्रावधान का भी उन्होंने उल्लेख किया है।
संपर्क केंद्रों की भूमिका पर भी सवाल
जग्गा ने कहा कि संपर्क केंद्रों का गठन नागरिक सेवाओं की सुविधा के लिए किया गया है। ऐसे में तकनीक आधारित सेवा व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों की प्रक्रिया और लेनदेन लागत को कम करना होना चाहिए, न कि मूल दस्तावेज के मूल्य से कई गुना अधिक अतिरिक्त शुल्क का बोझ डालना।
उन्होंने प्रशासक से मामले की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि संपर्क केंद्रों पर ई-स्टांप जारी करने के दौरान लगाए जा रहे आवेदन और सुविधा शुल्क किस कानूनी प्रावधान अथवा सक्षम प्राधिकारी के आदेश के तहत वसूले जा रहे हैं।
साथ ही उन्होंने 319.40 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क की समीक्षा कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
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