आतंकियों से कनेक्शन, सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट...डर दिखा चंडीगढ़ में बुजुर्ग दंपती को रखा डिजिटल अरेस्ट; 2 करोड़ ठगे
चंडीगढ़ में साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त दंपति को आतंकी गतिविधियों में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर 2.62 करोड़ ...और पढ़ें

बुजुर्ग दंपती को डिजिटल अरेस्ट कर दो करोड़ की ठगी। (एआई जनरेटेड फोटो)
HighLights
खुद को एंटी टेररिज्म स्क्वाड का जांच अधिकारी बताया।
दंपती को आतंकी गतिविधियों में फंसाने का डर दिखाया।
सेवानिवृत्त कर्मचारी और पत्नी को 11 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा।
मनोज बिष्ट, चंडीगढ़। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने का डर दिखाकर साइबर ठगों ने सेक्टर-38सी निवासी पब्लिक हेल्थ विभाग से सेवानिवृत्त रतन चंद कश्यप और उनकी पत्नी प्रवीन कश्यप को 11 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा, इस दौरान उनसे दो करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई।
आरोपितों ने खुद को एंटी टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) का जांच अधिकारी विक्रम सिंह बताया और दंपती को विश्वास दिलाया कि कश्मीर में पकड़े गए आतंकियों के पास उनके आधार कार्ड और पैन कार्ड मिले हैं। आरोपितों ने दावा किया कि उनके दस्तावेजों पर एचडीएफसी बैंक में खाता खुलवाकर आतंकियों को 70 लाख रुपये दिए गए हैं।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने और पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने का डर दिखाया। इसके बाद दंपती को घर में ही रहने और अपने बैंक खातों की पूरी रकम राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के खाते में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।
उन्होंने सेक्टर-17 स्थित साइबर क्राइम थाने के एसएचओ को शिकायत देकर आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और ठगी गई रकम वापस दिलाने की मांग की है। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
45 दिन पुणे में रखने की धमकी
रतन चंद कश्यप के वाट्सएप नंबर पर एक अज्ञात नंबर से वायस काॅल आई। काल करने वाले ने खुद को एंटी टेररिज्म स्क्वाड का जांच अधिकारी विक्रम सिंह बताया। उसने कहा कि कश्मीर में पकड़े गए आतंकियों के पास रतन चंद कश्यप और उनकी पत्नी प्रवीन कश्यप के आधार कार्ड और पैन कार्ड मिले हैं।
आरोपित ने दावा किया कि इन दस्तावेजों के आधार पर एचडीएफसी बैंक में खाता खुलवाया गया है, जिसमें आतंकियों ने 70 लाख रुपये जमा कराए हैं। पीड़ित के मुताबिक आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कही और धमकाया कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर ले जाएगी।
45 दिन पुणे में रखने की धमकी
बुजुर्ग दंपती को यह भी कहा गया कि दोनों को गिरफ्तार कर 45 दिनों के लिए महाराष्ट्र के पुणे स्थित एनएसए विभाग में रखा जाएगा, जहां उनके बैंक खातों की जांच होगी। ठगों ने दंपती को सामाजिक बदनामी और गिरफ्तारी का भय दिखाकर घर में ही रहने को कहा।
इसके बाद उनके बैंक खातों और फिक्स्ड डिपाजिट सहित वित्तीय दस्तावेजों की तस्वीरें भी ले लीं। फिर अलग-अलग बैंकों से रकम ट्रांसफर कराने का सिलसिला शुरू हुआ। चार बार में अलग-अलग खातों से आरटीजीएस के जरिए रुपये ठग लिए गए।
कई नंबरों से वीडियो और वायस काॅल
आरोपितों ने 29 सितंबर से 9 अक्टूबर के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वाट्सएप पर वीडियो और वायस काॅल की। वे लगातार दंपती को जांच, गिरफ्तारी और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामले का डर दिखाते रहे। 9 अक्टूबर को आरोपितों ने बताया कि उनके खातों में कोई आतंकवादी गतिविधि नहीं मिली है और अगले दिन उनकी पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।
हालांकि, 11 अक्टूबर को जब दंपती ने आरोपितों से संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन उठाना बंद कर दिया। इसके बाद पीड़ितों को संदेह हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। पीड़ित की शिकायत पर अज्ञातों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।
