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गैरहाजिर DSP-इंस्पेक्टर को चंडीगढ़ कोर्ट की दो टूक, अब पेश नहीं हुए तो बिना सुने होगा फैसला

By Ravi Atwal Edited By: Sohan Lal
Published: Sat, 24 Oct 2026 07:05 AM (IST)

6 करोड़ की लूट के आरोपित को फायदा पहुंचाने के आरोप में फंसे इंस्पेक्टर के खिलाफ डीएसपी और इंस्पेक्टर पेश ...और पढ़ें

पुलिस अफसरों के पेश न होने पर कोर्ट सख्त।

पुलिस अफसरों के पेश न होने पर कोर्ट सख्त।

HighLights

  1. गैरहाजिर DSP-इंस्पेक्टर को चंडीगढ़ कोर्ट की चेतावनी।

  2. इंस्पेक्टर पर लूट के आरोपितों को फायदा पहुंचाने का आरोप।

  3. अब कोर्ट मामले में अगली सुनवाई 13 नवंबर को करेगा।

रवि अटवाल, चंडीगढ़। छह करोड़ की लूट के आरोपितों को फायदा पहुंचाने के मामले में आरोपित चंडीगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह के खिलाफ जिला अदालत में केस चल रहा है। इंस्पेक्टर जसमिंदर डिस्ट्रिक्ट क्राइम सेल के इंचार्ज भी रहे हैं। उनके खिलाफ चल रहे मामले में डीएसपी धीरज कुमार और इंस्पेक्टर बलदेव कुमार जवाब देने नहीं आ रहे हैं।

जसमिंदर ने खुद को बेकसूर बताते हुए अदालत में डिस्चार्ज यानी आरोपमुक्त किए जाने की अर्जी दायर की है। इस अर्जी पर डीएसपी धीरज और बलदेव कुमार को कोर्ट में पेश होने और जवाब देने के लिए कहा गया था, लेकिन वे गैरहाजिर रहे। डीएसपी धीरज एक हत्याकांड की जांच में व्यस्त थे, जबकि बलदेव छुट्टी पर थे।

इससे पहले भी उन्हें कोर्ट ने पेश होने के निर्देश दिए थे। दो महीने पहले डीएसपी धीरज कोर्ट आए भी थे लेकिन तब उनके जवाब से जज संतुष्ट नहीं हुए तो उन्हें दोबारा बुलाया गया था।

ऐसे में इस बार गैरहाजिर रहने पर कोर्ट ने दोनों पुलिस अधिकारियों को चेतावनी दे दी है कि अगर अगली तारीख पर वे पेश नहीं हुए तो यह माना जाएगा कि उन्हें इस अर्जी पर कुछ नहीं कहना है। ऐसी स्थिति में अदालत उन्हें बिना सुने ही अपना फैसला सुना देगी। अब मामले की सुनवाई 13 नवंबर को होगी।

इसलिए गिरफ्तार हुए थे इंस्पेक्टर जसमिंदर

पिछले साल मार्च में डिस्ट्रिक्ट क्राइम सेल के इंचार्ज रहे इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह को लूट के आरोपितों से मिलीभगत के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। चंडीगढ़ पुलिस ने राकी और गौरव नाम के दो युवकों को अवैध हथियारों सहित पकड़ा था।

पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपित उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित एक निजी कंपनी से करीब छह करोड़ रुपये की लूट के बाद चंडीगढ़ पहुंचे थे। जांच में यह भी पता चला था कि चंडीगढ़ पहुंचने के बाद आरोपितों की कुछ स्थानीय लोगों से बातचीत हुई।

आरोप है कि इन्हीं लोगों ने इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह के साथ मिलकर एक साजिश रची, जिसके तहत लूट के आरोपितों को आर्म्स एक्ट के एक झूठे मामले में फंसाकर चंडीगढ़ जेल में सुरक्षित रखने की तैयारी थी, ताकि उत्तर प्रदेश पुलिस उन्हें अपने कब्जे में न ले सके।

मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर जसमिंदर को गिरफ्तार कर लिया था और उन्हें निलंबित कर दिया गया था। हालांकि विभागीय स्तर पर उन्हें बहाल किया जा चुका है।