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सिरके की सीलबंद बोतलों में मिले खतरनाक तत्व, चंडीगढ़ कोर्ट ने कंपनी पर लगाया भारी जुर्माना

By Ravi Atwal Edited By: Sohan Lal
Published: Mon, 14 Sep 2026 01:28 PM (IST)

चंडीगढ़ की एक अदालत ने जीरकपुर स्थित बोर्जस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सिरके ...और पढ़ें

चंडीगढ़ जिला अदालत ने सुनाया फैसला। (सांकेतिक फोटो)

चंडीगढ़ जिला अदालत ने सुनाया फैसला। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सचिन यादव की कोर्ट का फैसला।

  2. बोर्जस इंडिया पर 40 हजार रुपये का जुर्माना लगा।

  3. सिरके में सल्फाइट, लेड, कॉपर तय सीमा से अधिक मिले।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। सिरके की सीलबंद बोतलों में खतरनाक तत्व पाए जाने के मामले में जिला अदालत ने एक कंपनी को दोषी ठहराया है। अदालत ने जीरकपुर स्थित बोर्जस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि विशाल गुप्ता पर 40 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।

दो साल पहले इस कंपनी के सिरके की बोतलों में सल्फाइट, लेड और कापर की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई थी। जिसके बाद कंपनी के खिलाफ केस दर्ज हुआ।

इस केस की सुनवाई जिला अदालत में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सचिन यादव की कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने कंपनी को इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि इस केस में अदालत ने रिटेलर घनश्याम दास गर्ग को दोषी नहीं बताया और उन्हें बरी कर दिया।

मामला 18 दिसंबर 2024 का है। फूड सेफ्टी अधिकारी मंदीप कौर ने इंडस्ट्रियल एरिया स्थित रिटेलर प्रेम एजेंसीज में चेकिंग की थी। जांच के दौरान विभाग की टीम ने वहां बेचे जा रहे सिरके की 29 बोतलों को कब्जे में लिया। इनमें से चार बोतलों के नमूने जांच के लिए रखे गए।

एक नमूने को जांच के लिए पंचकूला स्थित फूड एनालिस्ट इंटरस्टेलर टेस्टिंग सेंटर में भेजा गया। 30 दिसंबर 2024 को उस लैब की रिपोर्ट मिली जिसमें सिरके को अनसेफ फूड यानी असुरक्षित बताया गया। हालांकि रिटेलर घनश्याम दास ने इस रिपोर्ट को मानने से इनकार किया, जिस कारण इसकी दोबारा से टेस्टिंग करवाई गई।

गाजियाबाद भेजे गए सैंपल, फिर निकला सच

पुरानी रिपोर्ट को चुनौती दी गई जिस कारण विभाग ने नए सिरे से जांच के लिए सिरके के सैंपल को रैफरल फूड लेबोरेट्री, एनएफएल, गाजियाबाद में भेजा। वहां की रिपोर्ट में पता चला कि सिरके में सल्फाइट, लेड और कापर की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक थी।

ऐसे में इसे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत असुरक्षित करार दिया गया। ऐसे में आरोपितों के खिलाफ केस दायर कर उन्हें समन भेजे गए। अदालत में केवल कंपनी के खिलाफ यह आरोप साबित हुए और उन्हें 40 हजार रुपये जुर्माना भरने के निर्देश दिए गए।