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बिग बैश लीग पर सट्टे का केस साबित नहीं कर पाई चंडीगढ़ पुलिस, कोर्ट ने तीन युवक किए बरी

By Ravi Atwal Edited By: Sohan Lal
Published: Tue, 29 Sep 2026 06:39 PM (IST)

चंडीगढ़ पुलिस बिग बैश लीग सट्टेबाजी का मामला साबित नहीं कर पाई। जिला अदालत ने तीन युवकों को सबूतों के ...और पढ़ें

चंडीगढ़ जिला अदालत ने सुनाया फैसला।

चंडीगढ़ जिला अदालत ने सुनाया फैसला।

HighLights

  1. पुलिस मैच का शेड्यूल और इलेक्ट्रॉनिक सबूत नहीं दे पाई।

  2. अदालत ने सबूतों के अभाव को बरी करने का आधार माना।

  3. 13 दिसंबर 2021 को सेक्टर-18 के मकान में पकड़े थे युवक।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। ऑस्ट्रेलिया में होने वाली बिग बैश लीग के एक मैच पर सट्टा लगाने के आरोप में गिरफ्तार तीन युवकों को जिला अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में संजीव उर्फ सोनू, विक्रम सिंह और मनप्रीत सिंह शामिल हैं।

पांच साल पहले पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ गैंबलिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। आरोप था कि वह बिग बैश लीग के मेलबर्न और ब्रिस्बेन के बीच खेले जा रहे मैच पर ऑनलाइन सट्टा लगवा रहे थे।

सेक्टर-19 थाना पुलिस ने 13 दिसंबर 2021 को सेक्टर-18 के मकान से तीन युवकों को गिरफ्तार कर उनके पास से 47 हजार रुपये, छह मोबाइल फोन, लैपटाप, प्रिंटर और अन्य सामान बरामद करने का दावा किया था।

हालांकि, अदालत में पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि आरोपित वास्तव में उक्त क्रिकेट मैच पर आनलाइन सट्टा लगा रहे थे। आरोपितों का केस लड़ने वाले एडवोकेट रमन सिहाग ने अदालत में कहा कि पुलिस कोर्ट में उस मैच के शेड्यूल को बतौर सबूत पेश नहीं कर सकी। ऐसे में यह संदेह पैदा हो रहा है कि जिस दिन पुलिस छापेमारी की बात कह रही क्या वास्तव में उस दिन मैच था।

बचाव पक्ष ने उठाया अहम सवाल

बचाव पक्ष ने सवाल उठाया कि जब पुलिस ने बिग बैश लीग के मैच पर सट्टा लगाने को आधार बनाकर केस दर्ज किया था तो चार्जशीट के साथ उस मैच का आधिकारिक शेड्यूल भी होना चाहिए था। जिरह में जांच अधिकारी ने भी यह चूक को स्वीकार किया। अदालत ने भी इसे महत्वपूर्ण कमी माना।

इसके अलावा पुलिस ने यह भी स्वीकार किया कि जिन छह मोबाइल फोन, लैपटाॅप और प्रिंटर को बरामद किया गया, उन्हें फारेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गया। अदालत ने कहा कि आनलाइन सट्टेबाजी को साबित करने के लिए इलेक्ट्रानिक सबूत अहम थे, लेकिन जांच एजेंसी ने ऐसा कोई ठोस साक्ष्य रिकार्ड पर नहीं रखा।