CHB के मकानों में नीड बेस्ड चेंज पर क्या होगा फैसला? कमेटी आज सौंपेगी रिपोर्ट; 62 हजार परिवारों की टिकी नजर
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की बैठक में सीएचबी मकानों में जरूरत आधारित बदलावों पर गठित कमेटी की 545 पेज की रिपोर्ट ...और पढ़ें

चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकानों में रह रहे 62 हजार परिवार। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
जरूरत अनुसार किए बदलावों को नियमित करने की मांग।
कमेटी की 545 पेज की रिपोर्ट पर बैठक में चर्चा की जाएगी।
एचआईजी मकानों का एफएआर बढ़ाने और सोलर प्लांट का प्रस्ताव।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) की बुधवार को होने वाली बैठक अहम रहने वाली है। बैठक में सीएचबी के मकानों में जरूरत आधारित बदलावों (नीड बेस्ड चेंज) को लेकर गठित कमेटी की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। 62 हजारों परिवारों की नजरें इस बैठक पर टिकी हुई हैं।
बैठक की अध्यक्षता चंडीगढ़ प्रशासन के चेयरमैन-सह-चीफ सेक्रेटरी करेंगे। 545 पेज की रिपोर्ट पर बैठक में चर्चा की जाएगी, जिसे सीएचबी की मंजूरी के बाद प्रशासक के पास भेजा जाएगा। हाउसिंग बोर्ड के 62 हजार मकानों में रहने वाले परिवार लंबे समय से जरूरत के अनुसार किए गए बदलाव को नियमित करने की मांग कर रहे हैं।
कमेटी सरकारी जमीन पर हुए निर्माण को नियमित करने के लिए समर्थन में नहीं है। बोर्ड ने तीन माह पहले जरूरत आधारित बदलावों के मामले में व्यावहारिक समाधान तलाशने के लिए कमेटी का गठन किया था। यह भी निर्णय लिया गया था कि जब तक कमेटी की सिफारिशें लागू नहीं की जाती तब तक वायलेशन के नोटिस भी नहीं भेजे जाएंगे।
कमेटी ने विभिन्न श्रेणी के मकानों में किए गए बदलावों और लोगों की मांगों को लेकर स्थिति का अध्ययन किया है। खासतौर पर लोगों को यह उम्मीद है कि मामूली और लंबे समय से चले आ रहे जरूरत आधारित बदलावों को नियमित करने या उनके संबंध में राहत देने का कोई रास्ता निकाला जा सकता है।
नीड बेस्ड चेंज को लेकर बोर्ड के हजारों मकान मालिक लंबे समय से समाधान की मांग कर रहे हैं। यदि रिपोर्ट में राहत संबंधी सुझाव दिए जाते हैं और बोर्ड उन्हें मंजूरी देता है तो इससे बड़ी संख्या में परिवारों को फायदा मिल सकता है। कमेटी ने यह रिपोर्ट हाउसिंग बोर्ड के मकान में रहने वाले लोगों से सुझाव लेकर तैयार किया है।
सिफारिश में बालकनी के अलावा एचआईजी के मकानों का एफएआर (फ्लोर एरिया रेशो) बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है जिसमें इन मकानों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
बोर्ड की बैठक में हाउसिंग बोर्ड के मकानों की छत पर सोलर पावर प्लांट लगाने का भी प्रस्ताव चर्चा के लिए आ रहा है। मंजूरी मिलने के बाद पीएम सूर्य योजना के तहत इन मकानों में रहने वाले लोग भी सोलर पावर प्लांट लगा पाएंगे।
25 फीसद आबादी रहती है इन मकानों में
लोग दिल्ली पैटर्न पर नीति लाने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने शहर के सभी हाउसिंग बोर्ड के मकानों का सर्वे किया है जिसमें प्रशासन का दावा है कि 90 फीसद मकानों में वाॅयलेशन है।
शहर की 25 फीसद से ज्यादा आबादी इन मकानों में रहती है। बैठक में इसके अलावा सीएचबी की आवासीय इकाइयों में लिफ्ट लगाने को लेकर गठित कमेटी की दूसरी रिपोर्ट भी बोर्ड के समक्ष रखी जाएगी। इन रिपोर्टों की सिफारिशों को मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
लोग दिल्ली पैटर्न पर चाहते हैं राहत
हाउसिंग बोर्ड के मकानों में रहने वाले लोग दिल्ली पैटर्न पर वन टाइम राहत मांग रहे हैं ताकि इस मुद्दे का स्थायी हल निकल आए। प्रशासन दिल्ली पैटर्न को भी स्टडी कर रहा है।
पिछले 20 साल में हुए हर चुनाव में हर दल की ओर से इस मुद्दे को स्थायी तौर पर हल करने का वायदा किया जाता है। लेकिन चुनाव के बाद इस मुद्दे की राहत में अफसरशाही और नियम आ जाते हैं। इस समय शहर में 90 फीसद से ज्यादा मकानों में जरूरत के अनुसार अतिरिक्त निर्माण किया हुआ है। जिसे प्रशासन वायलेशन मानता है।
छह राज्य दे चुके हैं राहत
अभी तक देशभर में छह राज्य सरकारें इस तरह की राहत दे चुकी हैं। लोग बदलाव को नियमित करने के बदले में इसके लिए वह प्रशासन को भुगतान भी करने को लिए तैयार हैं। लोगों का कहना है कि जब दूसरे राज्य अपने यहां के लोगों को राहत दे रहे हैं तो चंडीगढ़ प्रशासन ऐसा क्यों नहीं कर रहा।
उधर प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों ने अपने मकानों में बदलाव किए हैं वह नियमों के खिलाफ हैं। इन्हें स्थायी करने का अधिकार सिर्फ गृह मंत्रालय के पास है, क्योंकि चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश है।
इन राज्य सरकारों ने दी है वन टाइम राहत
झारखंड सरकार ने 2019, गोवा में 2016, ओडिशा में 2019, दिल्ली में 1999 और उत्तराखंड सरकार की ओर से भी सीएचबी की ओर से तरह अलाट किए हुए मकानों में किए गए बदलाव को वन टाइम नियमित किया हुआ है।
इसके साथ ही दिल्ली सरकार की ओर से डीडीए के फ्लैट्स में हुए बदलाव को भी नियमित किया हुआ है। समय-समय पर पंजाब और हरियाणा की सरकारें भी अपने यहां की अवैध कालोनियों को नियमित करने के आदेश जारी कर चुकी हैं।
