चंडीगढ़ में CHB के मकानों में जरूरत मुताबिक बदलाव की मंजूरी अटकी, 62 हजार परिवारों की चिंता बढ़ी
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकानों में किए गए ढांचागत बदलावों को नियमित करने की मंजूरी टाउन प्लानिंग विंग की आपत्तियों ...और पढ़ें

सीएचबी के मकानों में जरूरत के मुताबिक किए बदलावों की मंजूरी का इंतजार। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
सीएचबी मकानों में बदलाव नियमित करने पर अड़ंगा।
टाउन प्लानिंग विंग की पीछे की तरफ किए निर्माण पर आपत्ति।
62 हजार परिवारों को राहत का था इंतजार।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के मकानों में जरूरत के मुताबिक किए गए निर्माण और ढांचागत बदलावों को नियमित करने की मंजूरी फिर से अटकी गई है। इससे 62 हजार परिवारों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
सीएचबी की ओर से दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की तर्ज पर राहत देने की संभावनाएं तलाशी जा रही थीं, लेकिन टाउन प्लानिंग विंग ने कई तरह के निर्माण पर आपत्ति जताई है। सबसे बड़ी आपत्ति मकानों के पीछे की तरफ किए गए निर्माण को लेकर है।
टाउन प्लानिंग विंग का मानना है कि जिन हिस्सों को मूल रूप से खुले स्थान, वेंटिलेशन और हवा के आवागमन के लिए रखा गया था, वहां कमरे बनाना, पूरे पिछवाड़े को ढक देना या पक्की दीवारें खड़ी करना नियोजन के निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं है। ऐसे निर्माणों को नियमित करने से शहर के मूल भवन नियोजन और मास्टर प्लान के प्रावधान प्रभावित हो सकते हैं।
परिवार बढ़े तो मकानों में किए बदलाव
चंडीगढ़ में सीएचबी के 62 हजार से अधिक फ्लैट्स हैं। इनमें बड़ी संख्या में आवंटियों ने समय के साथ परिवार की जरूरतों के अनुसार बदलाव किए हैं। कई सेक्टरों में ग्राउंड फ्लोर के मकानों के आंगन को कवर कर कमरे, बड़ी रसोई या अतिरिक्त शौचालय बना लिए गए हैं।
कुछ स्थानों पर ग्राउंड फ्लोर पर हुए ऐसे निर्माणों के ऊपर पहली मंजिल के आवंटियों ने भी आपसी सहमति से अतिरिक्त कमरे बना लिए। इससे मकानों में उपलब्ध जगह तो बढ़ गई, लेकिन निर्माण निर्धारित नियमों के दायरे से बाहर हो गए।
डीडीए की तर्ज पर राहत की कोशिश
सीएचबी की ओर से जरूरत के आधार पर किए गए बदलावों को नियमित करने के लिए डीडीए की नीति को आधार बनाकर समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही थी।
हालांकि, चंडीगढ़ की अपनी भवन नियोजन व्यवस्था और मास्टर प्लान के प्रावधानों के कारण इस मामले में दिल्ली की व्यवस्था को सीधे लागू करना आसान नहीं है। टाउन प्लानिंग विंग की आपत्तियों के बाद अब यह तय करना चुनौती होगी कि किन बदलावों को नियमों के दायरे में लाया जा सकता है और किन निर्माणों को नियमित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
हजारों आवंटियों को फैसले का इंतजार
मकानों में किए गए बदलावों को लेकर आवंटियों और प्रशासन के बीच लंबे समय से समाधान की उम्मीद बनी हुई है। आवंटियों का तर्क है कि परिवारों की जरूरत और सीमित जगह के कारण उन्हें मकानों में अतिरिक्त निर्माण करना पड़ा। वहीं, नियोजन संबंधी नियमों का पालन करना प्रशासन के लिए जरूरी है।
ऐसे में नियमितीकरण की नीति तैयार करने से पहले निर्माण की प्रकृति, खुले स्थानों और वेंटिलेशन पर उसके प्रभाव तथा भवन नियमों के अनुरूप होने जैसे पहलुओं पर विचार करना होगा। फिलहाल टाउन प्लानिंग विंग की आपत्तियों के चलते हजारों आवंटियों को राहत के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है।
