580 करोड़ के घोटालों की सुनवाई, ट्रैफिक चालानों का निपटारा भी; चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट पर वर्कलोड
चंडीगढ़ की सीबीआई स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट पर 580 करोड़ रुपये के घोटालों के साथ अब ट्रैफिक चालानों के निपटारे ...और पढ़ें

सीबीआई की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में 33 मामले लंबित। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में धोखाधड़ी के 33 मामले।
एक साल से लेकर 15 वर्ष पुराने भी हैं कई मुकदमे।
वकीलों ने गंभीर मामलों की सुनवाई प्रभावित होने पर जताई चिंता।
रवि अटवाल, चंडीगढ़। करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों की सुनवाई कर रही चंडीगढ़ की सीबीआई स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट पर ट्रैफिक चालानों के निपटारे का भी बोझ बढ़ रहा है।
यहां ट्रैफिक चालान के भी रोजाना केस आ रहे हैं जबकि यहां पहले से 580 करोड़ रुपये के घोटालों के बड़े मुकदमे चल रहे हैं। इनमें कुछ मामले एक-दो साल पुराने हैं तो कुछ की न्यायिक प्रक्रिया करीब 15 साल से चल रही है।
ऐसे में गंभीर आर्थिक अपराधों के मामलों की सुनवाई के बीच अदालत पर ट्रैफिक चालानों का अतिरिक्त काम आने से न्यायिक कामकाज पर बोझ आ रहा है। सीबीआई की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में कई बड़ी कंपनियों के बैंक फ्राॅड के मामले चल रहे हैं। इस कोर्ट में अब तक 33 मामले लंबित हैं।
वकील कर रहे विरोध
इन गंभीर मामलों के साथ अदालत को ट्रैफिक चालानों के निपटारे की जिम्मेदारी दिए जाने से उसके काम का दायरा और बढ़ गया है। ट्रैफिक चालानों से संबंधित मामलों में भी अदालत के स्टाफ को रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य औपचारिकताओं का काम करना पड़ता है।
दूसरी ओर, सीबीआई के पुराने मामलों की सुनवाई पहले से लंबित है। कुछ वकीलों ने अदालत को ट्रैफिक चालानों की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपे जाने पर नाराजगी भी जताई है और कहा है कि गंभीर मामलों की सुनवाई प्रभावित न हो, इसके लिए चालानों के निपटारे की अलग व्यवस्था होनी चाहिए।
कुछ बड़ी कंपनियों के बड़े घोटाले
| कंपनी | घोटाले/मामले की राशि | केस की अवधि | आरोप |
|---|---|---|---|
| सूर्या फार्मास्यूटिकल | 207 करोड़ रुपये | 9 साल | बैंकों से लिए कर्ज को फार्मा कारोबार के बजाय कथित तौर पर शेल कंपनियों में डायवर्ट करने के आरोप। |
| जेआर एग्रोटेक | 58.19 करोड़ रुपये | करीब ढाई साल | चावल कारोबार के लिए ली गई क्रेडिट सुविधाओं में जाली दस्तावेज तैयार करने और कागजों पर गलत स्टॉक दिखाकर बैंक से धोखाधड़ी के आरोप। |
| बजाज बासमती प्राइवेट लिमिटेड | 137 करोड़ रुपये | डेढ़ साल से ज्यादा | बैंकों से लिए कर्ज का निर्धारित कारोबार के बजाय अन्य क्षेत्रों में कथित इस्तेमाल और गलत कारोबारी रिपोर्ट पेश करने के आरोप। |
| लखानी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड | 53.61 करोड़ रुपये | डेढ़ साल | बैंक से लिए कर्ज का इस्तेमाल कथित तौर पर अपनी अन्य कंपनियों का कर्ज और ब्याज चुकाने में करने के आरोप। |
| एसएस टेक्नो कंसल्ट | 17.23 करोड़ रुपये | 5 साल | फर्जी दस्तावेज और गलत नेटवर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर आईडीबीआई बैंक से क्रेडिट सुविधा लेने, लोन की रकम दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर करने और गिरवी संपत्तियां बेचने के आरोप। |
