3500 रुपये रिश्वत का दाग और अब 4 साल की सजा, आठ साल पुराने मामले में चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट का फैसला
चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट ने आठ साल पुराने रिश्वत मामले में एक चपरासी को चार साल की जेल और 20 हजार ...और पढ़ें

इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत चपरासी को कोर्ट ने सुनाई सजा। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
इंजीनियरिंग विभाग के चपरासी को सुनाई सजा।
अदालत ने 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
कोर्ट ने कहा- संस्थान अपने उद्देश्य से भटक चुके।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। 3500 रुपये रिश्वत लेने के चक्कर में एक चपरासी को अब चार साल की जेल काटनी पड़ेगी। सीबीआई की विशेष अदालत ने आठ साल पुराने मामले में चंडीगढ़ प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत फतेज सिंह को दोषी करार देते हुए चार साल की सजा सुलाई।
अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। इस मामले में अदालत ने भ्रष्टाचार पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों में भ्रष्टाचार इस हद तक पहुंच गया है कि जनता की सेवा के लिए बनाए गए संस्थान ही अपने उद्देश्य से भटक चुके हैं।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों का ऐसा व्यवहार सार्वजनिक संस्थानों के कामकाज को पंगु बना रहा है। इससे राज्य की लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल उद्देश्य में भी बाधा पहुंच रही है।
सीबीआई ने डड्डूमाजरा काॅलोनी निवासी राजिंदर कुमार की शिकायत पर यह केस दर्ज किया था। राजिंदर ने शिकायत में बताया था कि उनके पिता धन सिंह लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), यूटी में मिस्त्री थे।
वह 31 जुलाई 2010 को सेवानिवृत्त हुए और जनवरी 2014 में उनका निधन हो गया था। इसके बाद राजिंदर कुमार अपने पिता की पेंशन के एरियर की राशि अपनी मां के बैंक खाते में जमा करवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे।
इस दौरान उनकी मुलाकात फतेह सिंह से हुई, जिसने बिल तैयार करने के बदले चार हजार रुपये रिश्वत मांगी। बातचीत के बाद 3500 रुपये में सौदा तय हुआ। शिकायत मिलने पर सीबीआई ने सेक्टर-9 स्थित एक्सईएन कार्यालय के पास जाल बिछाया और फतेह को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया था। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फतेह सिंह को दोषी करार दिया और सजा सुना दी।
