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चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन का चुनाव जीते, खर्च का हिसाब देख बोले-इतने में तो दो निगम चुनाव लड़ लेते

Published: Sun, 20 Sep 2026 08:17 PM (IST)

चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन चुनाव जीतने के बाद एक पदाधिकारी अपने भारी खर्च से हैरान हैं। हिसाब-किताब देखकर वह यही बोले कि इतने में तो दो निगम चुनाव लड़ लेते।

जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की ने किया सम्मानित।

जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की ने किया सम्मानित।

HighLights

  1. बार एसोसिएशन चुनाव में भारी खर्च से विजेता पदाधिकारी हैरान।

  2. निगम चुनाव से पहले विकास कार्य, पेवर ब्लॉक पर सवाल।

  3. कांग्रेस में दल-बदलुओं की टिकट मांग, आरक्षण से बदली रणनीति।

राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। शहर में जिला बार एसोसिएशन के चुनाव का शोर अभी पूरी तरह थमा नहीं है, लेकिन अब चर्चा वोटों से ज्यादा खर्च की हो रही है। चुनाव में किसने कितने वोट लिए, यह तो नतीजों में साफ हो गया, मगर किसने कितनी बार पार्टी दी और कितना खर्च किया, इसका हिसाब अभी गपशप के दौर में चल रहा है।

बार में इन दिनों यही चर्चा है कि चुनाव लड़ना आसान है, लेकिन चुनाव के बाद खर्च का कैलकुलेटर संभालना मुश्किल। बताया जा रहा है कि कुछ उम्मीदवारों के समर्थक प्रचार में इतने व्यस्त रहे कि काम-धंधे से ज्यादा ध्यान चुनावी गणित पर रहा।

जीत के बाद एक नवनिर्वाचित पदाधिकारी ने जब बैठकर पूरे खर्च का हिसाब लगाया तो माथा पकड़ लिया। दोस्त से बोले कि इतना खर्च हो गया, इतने में तो दो नगर निगम चुनाव लड़ लेते।

उधर, जीतने वालों को पूरी ट्राईसिटी से बधाइयां मिल रही हैं। कांग्रेस ने भी नवनिर्वाचित अध्यक्ष एस. गुजराल और उपाध्यक्ष अभय जोशी का सम्मान किया। अब नई चर्चा यह है कि जब बार का चुनाव जीत ही गए हैं तो नगर निगम का मैदान भी क्यों न आजमा लिया जाए।

पेवर ब्लाॅक का चुनावी मौसम

नगर निगम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, शहर में विकास कार्यों की रफ्तार भी देखकर लगता है कि शायद चुनाव की तारीख के साथ कामों की भी अंतिम तारीख तय हो गई है।

किसी वार्ड में सड़क बन रही है तो कहीं ओपन एयर जिम लग रहा है और कहीं पेवर ब्लाक अपनी पुरानी जगह छोड़कर नई जगह पहुंच रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल ने इंटरनेट मीडिया पर उखड़े हुए पेवर ब्लाक की तस्वीर डालकर सवाल उठाया तो निगम और प्रशासन के अधिकारियों की भी नजर इस पर गई।

तस्वीर में पुराने पेवर ब्लाक काफी हद तक सही नजर आ रहे थे। सवाल यही उठा कि जब ब्लाक टूटे नहीं तो इन्हें बदलने की जरूरत क्यों पड़ी। अब गपशप यह है कि शहर में पेवर ब्लाक भी शायद चुनावी मौसम पहचानने लगे हैं।

सालभर आराम से पड़े रहते हैं और चुनाव आते ही उनकी किस्मत जाग जाती है, कभी उखड़ते हैं, कभी लगते हैं और कभी फिर उखड़ने की तैयारी में नजर आते हैं। लोगों की सीधी मांग है-काम चुनाव के समय ही नहीं, पूरे साल होते रहें तो शहर भी खुश और जनता भी।

चोरी के सवाल पर ग्रह-दोष

चोरी के एक मामले में पुलिस के हत्थे चढ़े एक आरोपित से पूछताछ का किस्सा इन दिनों चर्चा में है। बताया जाता है कि पुलिस जब चोरी का सामान और वारदात से जुड़े सवाल पूछ रही थी तो आरोपित ने जवाब देने के बजाय थाना प्रभारी की ही कुंडली पढ़नी शुरू कर दी।

कहने लगा—साहब, आपके ग्रह ठीक नहीं चल रहे हैं, मैं इन्हें ठीक कर सकता हूं। अब पुलिस वाले चोरी का सुराग तलाश रहे थे और सामने से ज्योतिष की क्लास शुरू हो गई। सवाल चोरी का, जवाब ग्रह-नक्षत्र का।

गपशप यह है कि पंडित जी ने शायद सोचा होगा कि अगर थाना प्रभारी का ध्यान ग्रह-दोष पर लग गया तो चोरी के सवाल कुछ देर के लिए ग्रहण में चले जाएंगे। लेकिन पुलिस भी आखिर पुलिस है।

रिमांड में पूछताछ आगे बढ़ी तो कथित पंडिताई ज्यादा देर नहीं चली और पुलिस के अनुसार चोरी की वारदातों और सामान से जुड़े सुराग सामने आने लगे। अब चर्चा यही है—ग्रह चाहे जितने टेढ़े हों, पुलिस की पूछताछ के आगे आखिरकार राज खुल ही गया।

कांग्रेस में नो एंट्री किसकी

राजनीति में इन दिनों दल-बदल का मौसम पूरे शबाब पर है। कांग्रेस में आने वालों की लाइन लगी है और हर आने वाले की पहली फरमाइश भी लगभग एक जैसी—“पार्टी में स्वागत बाद में, पहले टिकट पक्का करो!”

उधर भाजपा ने फिलहाल दल-बदलुओं के लिए नो एंट्री का बोर्ड लगा रखा है। कांग्रेस के पुराने नेता भी सोच में हैं कि भाई, टिकट बांटने के लिए वार्ड तो 35 ही हैं, लेकिन टिकट के दावेदार शायद 350 हो जाएं तो क्या होगा। असली फिल्म टिकट वितरण के समय शुरू होने वाली है।

आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में आए कुछ नेताओं की तो आरक्षण ने ही पटकथा बदल दी। जिस वार्ड में खुद चुनाव लड़ने का सपना देखा था, वहां महिला या एससी आरक्षण आ गया। अब कोई पत्नी की राजनीति चमकाने में जुटा है तो कोई दूसरे वार्ड की तलाश में।

सीनियर नेता कह रहे हैं कि टिकट की गारंटी किसी को नहीं दी। गपशप करने वाले कहते हैं कि गारंटी नहीं दी गई, लेकिन उम्मीद की वारंटी जरूर सबको मिल गई है।