वुडकट तकनीक से पेंटिंग्स बनाना कितना आसान, चंडीगढ़ के गवर्नमेंट काॅलेज ऑफ आर्ट में चल रही क्लास
चंडीगढ़ के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट में छात्र वुडकट प्रिंटिंग तकनीक सीख रहे हैं। यहां लकड़ी पर डिजाइन उकेरकर कलाकृतियां बनाई जा रही हैं।
HighLights
चंडीगढ़ आर्ट कॉलेज में छात्र सीख रहे वुडकट प्रिंटिंग तकनीक।
असिस्टेंट प्रोफेसर लखविंदर सिंह दे रहे हैं वुडकट का प्रशिक्षण।
छात्रों की कलाकृतियां भविष्य की प्रदर्शनियों में होंगी प्रदर्शित।
एकता श्रेष्ठ, चंडीगढ़। लकड़ी का एक टुकड़ा… पहली नजर में बिल्कुल सादा और खामोश। लेकिन जब आर्ट स्टूडेंट्स की कल्पना और हाथ की बारीकी इसे छूती चली गई है तो यही लकड़ी एक कहानी कहने लगी। ऐसे में कहीं महीन लकीरों में मिथोलाजी के पात्र उभरते है तो कहीं मिनिएचर पेंटिंग से प्रेरित रंग पूरे दृश्य में जान डाल देते है।
सेक्टर-10 के गवर्नमेंट काॅलेज ऑफ आर्ट में ऐसा ही माहौल देखने को मिल रहा है। दरअसल यहां पर प्रिंट मेकिंग की वुडकट तकनीक के बारे में स्टूडेंट्स को जानकारी दी जा रही है। ताकि स्टूडेंट्स कला की इस शैली का सफर समझ पाए।
इन स्टूडेंट्स को यह सब सिखा रहे है असिस्टेंट प्रोफेसर लखविंदर सिंह। जानकारी देते हुए इन्होंने बताया कि लकड़ी पर डिजाइन उकेरने से लेकर इंक और मशीन की मदद से उसे कागज पर उतारने तक, हर कदम पर धैर्य की जरूरत पड़ती है।
रही बात वुडकट की तो यह पारंपरिक तकनीक है। अभी 17 स्टूडेंट्स आर्ट वर्क बना रहे हैं। 12 से 15 दिन इनका काम खत्म हो जाएगा। फिर आगे चलकर इनके यह आर्ट वर्क समय-समय पर आयोजित होने वाली एग्जीबिशन में डिस्प्ले किए जाएंगे। अपने यही आर्ट वर्क स्टूडेंट्स आगे चलकर किसी कंपीटिशन में भी भेज सकते है।
इस तरह बनती हैं पेंटिंग्स
- सबसे पहले तय होता है विषय
- इसके बाद तैयार किया जाता है लेआउट
- तैयार डिजाइन को लकड़ी के सतह पर उतारा जाता है। जो वुडकट का आधार बनता है।
- डिजाइन बनाने के लिए लकड़ी पर नक्काशी की जाती है।
- फिर इंक तैयार करके लकड़ी की सतह पर रोलर की मदद से लगाया जाता है।
- इंक लगी लकड़ी को कागज के साथ प्रेसिंग मशीन में रखा जाता है। दबाव पड़ने पर लकड़ी की उभरी हुई सतह का डिजाइन कागज पर ट्रांसफर हो जाता है।
- आखिर में सामने आता है वुडकट का प्रिंट। जरूरत के अनुसार अलग-अलग रंगों या लेयर्स के प्रिंट भी लिए जा सकते है।
