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ड्रेन में बैक्टीरिया डालकर साफ होगा सीवर, चंडीगढ़ ने अपनाई मुंबई की तकनीक; 300 घर टूटने से बचे

Published: Fri, 25 Sep 2026 01:18 PM (IST)

चंडीगढ़ के फैंदा गांव में सीवर को बैक्टीरिया डालकर साफ किया जाएगा। इससे 300 परिवारों के घर टूटने से बच ...और पढ़ें

ड्रेन में विशेष बैक्टीरिया (माइक्रोबियल कंसोर्टियम) डालकर सीवर को साफ किया जाएगा। (एआई जनरेटेड फोटो)

ड्रेन में विशेष बैक्टीरिया (माइक्रोबियल कंसोर्टियम) डालकर सीवर को साफ किया जाएगा। (एआई जनरेटेड फोटो)

HighLights

  1. इस व्यवस्था के बाद बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की जरूरत नहीं।

  2. चंडीगढ़ नगर निगम ने अपनाई मुंबई की 'इन-सीटू' तकनीक।

  3. प्रदूषण स्तर घटाने के लिए 'काम दिखाओ, भुगतान पाओ' मॉडल।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चंडीगढ़ के फैंदा गांव से गुजर रहे गंदे नाले (ड्रेन) में विशेष बैक्टीरिया (माइक्रोबियल कंसोर्टियम) डालकर ही सीवर को साफ किया जाएगा। यह तकनीक इस गांव के करीब 300 परिवारों के लिए संकटमोचक बनी, क्योंकि अब उनके सिर से आशियाना छिनने का डर अब खत्म हो गया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के कड़े रुख के बाद जिन मकानों पर डिमोलिशन की तलवार लटक रही थी, उन्हें नगर निगम की एक आधुनिक वैज्ञानिक पहल ने बचा लिया है।

निगम अब मुंबई की तर्ज पर 'इन-सीटू' वेस्टवाटर ट्रीटमेंट तकनीक लागू करने जा रहा है। इस व्यवस्था के बाद न तो गांव में बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की जरूरत पड़ेगी और न ही किसी ग्रामीण का मकान टूटेगा।

ग्रामीणों के सामने खड़ी थी बड़ी चुनौती

फैदां गांव के लगभग 300 घरों का सीवेज सीधे खुले नाले (ड्रेन) में गिर रहा था। एनजीटी की सख्ती के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों को अल्टीमेटम दिया था कि वे या तो लाखों रुपये खर्च कर एसटीपी तक पाइपलाइन बिछाएं या घरों में सोखता गड्ढा (पिट) बनाएं।

ऐसा न करने पर निगम ने घरों को तोड़ने के नोटिस थमा दिए थे। क्षेत्र के पार्षद जसबीर सिंह लाडी के अनुसार, इस नई बायो-टेक्नोलॉजी के आने से अब गरीब परिवारों के घर सुरक्षित हो गए हैं।

कैसे काम करेगी यह तकनीक?

मुंबई की प्रदर्शनी में इस सफल मॉडल को देखने के बाद नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार और चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा ने शहर में इसे लागू करने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार कर लिया है।

सीधे नाले में बैक्टीरिया की डोज: बहते हुए गंदे पानी में खास सूक्ष्मजीवों का मिश्रण डाला जाएगा, जो जैविक रूप से गंदगी और प्रदूषकों (बायोलॉजिकल पॉल्यूटेंट्स) को खत्म करेंगे।

डिजिटल निगरानी: नाले पर फ्लो मीटर, सीसीटीवी कैमरे और डेटा लॉगर लगाए जाएंगे। पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए नियमित रूप से लैब टेस्टिंग होगी।

'काम दिखाओ, भुगतान पाओ' मॉडल पर टेंडर:  निगम ने इस प्रोजेक्ट में सरकारी पैसे के जोखिम को शून्य रखने के लिए 'परफॉर्मेंस बेस्ड कॉन्ट्रैक्ट' की शर्त रखी है। निगम कमिश्नर अमित कुमार ने स्पष्ट किया कि जब कंपनी मौके पर तकनीक की क्षमता साबित कर देगी और पानी एनजीटी के तय मानकों के अनुरूप साफ मिलेगा, तभी भुगतान किया जाएगा।

प्रदूषण का स्तर घटाने का बड़ा लक्ष्य

फैदां ड्रेन से प्रतिदिन 50 से 70 एमएलडी सीवेज निकलता है। नई तकनीक से प्रदूषण के स्तर को भारी मात्रा में घटाने का लक्ष्य रखा गया है। 

पैरामीटर वर्तमान स्थिति टारगेट
बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) 150–200 एमजी 10 से कम
सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) 300–400 एमजी 50 से कम
टीएसएस (टोटल सस्पेंडेड सॉलिड्स) 100–150 एमजी 20 से कम