चंडीगढ़ में 35 हजार परिवारों के लिए अच्छी खबर, मकानों के बनेंगे मालिक; गृह मंत्रालय से जल्द मंजूरी की उम्मीद
पुनर्वास योजना के तहत मिले मकानों में रहने वालों 35 हजार परिवारों को मालिकाना हक मिल सकता है। इसके लिए ...और पढ़ें

पुनर्वास योजना के तहत मिले मकानों पर जल्द मालिकाना हक मिलने की उम्मीद। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
प्रशासक ने गृह मंत्री के समक्ष उठाया था मुद्दा।
लंबे समय उठ रही है मालिकाना हक की मांग।
नीड बेस्ट चेंज को लेकर भी मिलेगी राहत।
राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। शहर में रहने वाले 35 हजार परिवारों के लिए अच्छी खबर है। इनको पुनर्वास योजना के तहत मिले मकानों पर जल्द मालिकाना हक मिल सकता है। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने संकेत दिए हैं कि लंबे समय से लंबित इस प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय अगले सप्ताह मंजूरी दे सकता है।
प्रशासक ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात की थी। इस दौरान चंडीगढ़ की पुनर्वास काॅलोनियों के मकानों को मालिकाना हक देने का मुद्दा उठाया था। प्रशासन की ओर से तैयार प्रस्ताव के अनुसार संपदा विभाग और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की ओर से समय-समय पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को करीब 35 हजार मकान आवंटित किए हैं।
अब इन पर मालिकाना हक दिया जाना है। इन मकानों का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराना था, लेकिन आवंटन के बाद भी लोगों को सामान्य संपत्ति की तरह पूर्ण और निर्बाध मालिकाना अधिकार नहीं मिल सके।
कई मामलों में मकान लाइसेंस फीस अथवा लीज आधारित व्यवस्था के तहत आवंटित किए गए। इसके कारण मकानों के हस्तांतरण, कब्जे और अन्य संपत्ति अधिकारों को लेकर लोगों को वर्षों से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मालिकाना हक नहीं होने के कारण परिवार इन मकानों को अपनी संपत्ति के रूप में पूरी तरह इस्तेमाल या हस्तांतरित भी नहीं कर पाते।
हर चुनाव में मुद्दा, अब समाधान की उम्मीद
पुनर्वास काॅलोनियों के मकानों को मालिकाना हक देने का मुद्दा लोकसभा में भी कई बार उठ चुका है। शहर में होने वाले हर लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की ओर से कालोनीवासियों को मालिकाना हक देने का वादा किया जाता रहा है। ऐसे में केंद्र से मंजूरी मिलने पर हजारों परिवारों को वर्षों पुरानी समस्या से राहत मिल सकती है।
नीड बेस चेंज पर भी राहत की तैयारी
मालिकाना हक के साथ ही प्रशासन नीड बेस चेंज को लेकर भी राहत देने की तैयारी में है। प्रशासन की ओर से संकेत दिया गया है कि मकानों में किए गए छोटे-मोटे निर्माण संबंधी उल्लंघनों को नियमित करने का रास्ता निकाला जाएगा।
इससे उन लोगों को राहत मिल सकती है, जिन्होंने परिवार की जरूरत के अनुसार मकानों में मामूली बदलाव या निर्माण कराया है। प्रशासन का मानना है कि नीड बेस चेंज को लेकर स्पष्ट नीति बनने से वर्षों से चली आ रही लोगों की परेशानी दूर होगी। मालिकाना हक और नीड बेस्ड चेंज, दोनों मामलों में अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की मंजूरी और निर्धारित नियमों के आधार पर होगा।
लीज पर दिए गए हैं मकान
यह मकान साल 1979 से पुनर्वास योजना के तहत लीज पर दिया गया था। अधिकतर की लीज 99 साल की है। साल 2011 में ही सुप्रीम कोर्ट ने जीपीए के आधार पर मकानों के ट्रांसफर पर रोक लगा दी थी। तभी से यह रोक जारी है।
मालिकाना हक मिलते ही कीमत दाेगुनी
डड्डूमाजरा, इंदिरा काॅलोनी, मनीमाजरा, मौलीजागरा, धनास, बापूधाम, सेक्टर-52 और 56 में ऐसी काॅलोनियां हैं जहां पर लोग मालिकाना हक की मांग कर रहा है। जब भी यह मकान कोई खरीदता है तो बैंक भी उसे लोन नहीं देता है। अगर लोगों को मालिकाना हक मिल जाए तो इन मकानों की कीमत दोगुनी हो जाएगी।
वर्ष 1990 में एक बार सिर्फ एक माह के लिए ही इन लोगों को मालिकाना हक दिलाने के लिए आवेदन करवाया गया था जो कि उसके बाद कभी भी नहीं हुआ। उस समय अधिकतर लोग इस से वंचित रह गए थे।
प्रशासन के अनुसार साल 1980 से अब तक 34,965 घर बनाए गए हैं। यह मकान आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को लीजहोल्ड या मासिक लाइसेंस शुल्क के आधार पर दिए गए थे।
कालोनी में रहने वाले लोगों की सभी दिक्कतें दूर होगी ।वह खुद इसके लिए गृह मंत्री से मिलकर आए हैं ।मालिकाना हक देने की मांग को मजबूती से प्रशासन की ओर से रखा गया है ।उम्मीद है कि जल्द ही गृह मंत्रालय से फाइल को मंजूरी मिल जाए ।जरूरत के अनुसार किए गए जो लोगों ने छोटे मोटे बदलाव किए हैं उन्हें भी मंजूर करने का प्रयास किया जा रहा है ।
गुलाब चंद कटारिया, प्रशासक, यूटी
