चंडीगढ़ में 24 घंटे जलापूर्ति प्रोजेक्ट नहीं होगा रद, बार-बार उठ रहे सवाल, विपक्षी पार्षद जता रहे विरोध
चंडीगढ़ में 24 घंटे जलापूर्ति प्रोजेक्ट रद नहीं होगा। विपक्षी पार्षद इस प्रोजेक्ट का लगातार विरोध कर रहे हैं, जिससे शहर में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। पार्षदों का आरोप है कि यह परियोजना नागरिकों पर अनावश्यक बोझ है और इसमें पारदर्शिता की कमी है। इस मुद्दे पर निगम सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए इसे रद करने की मांग रखी।

80 प्रतिशत पाइप बदली तो खर्च 438 करोड़ से बढ़कर होगा 1741 करोड़।
बलवान करिवाल, चंडीगढ़। 24x7 जल आपूर्ति परियोजना को अभी रद नहीं किया जाएगा। इस परियोजना को पूरे शहर में लागू करने के लिए जो डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनी है उसके हिसाब से इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। डीपीआर में बदलाव कर कुल पाइपलाइन में से 80 प्रतिशत को बदलकर ही यह संभव हो पाएगा।
परियोजना की कुल लागत 1741 करोड़ रुपये तक पहुंचेगी। इस बढ़े खर्च की मंजूरी और संशोधित प्रोजेक्ट को आवासीय एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को भेजा जाएगा। जो भी निर्णय होगा उस पर आगे बढ़ा जाएगा। यह निर्णय शुक्रवार को नगर निगम सदन की बैठक में लिया गया।
इस मुद्दे पर निगम सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए इसे रद करने की मांग रखी। कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट सफेद हाथी है। जिसका बोझ आम जनता पर पड़ने से उसका दम घुटेगा।
आप पार्षद योगेश ढींगरा और कांग्रेस पार्षद तरुणा मेहता ने कहा कि भारी भरकम लोन लेकर इस प्रोजेक्ट का कोई फायदा नहीं। इसकी शहर को जरूरत ही नहीं है न ही किसी ने 24 घंटे पानी की मांग की। जनता पर कई गुणा बोझ बढ़ेगा। वहीं पूर्व मेयर एवं भाजपा पार्षद अनूप गुप्ता ने कहा कि प्रोजेक्ट पर करना क्या है इसके अलग-अलग विकल्प सदन के सामने क्यों नहीं लाए गए।
अगर खारिज करते हैं या आगे बढ़ाते हैं तो क्या होगा जैसे विकल्प आने चाहिए थे। पहले ऐसे विकल्प आते रहे हैं। इस पर कमिश्नर अमित कुमार ने कहा कि पहले चल रहे प्रोजेक्ट के साथ ही आगे बढ़ना है या नहीं सदन के सामने यही निर्णय के लिए प्रस्ताव लाया गया। मेयर हरप्रीत कौर बबला ने कहा कि अगली बैठक में इस प्रोजेक्ट को सभी विकल्पों के साथ समीक्षा कर लाया जाएगा।
अनूप गुप्ता ने कहा कि एएफडी से लोन के साथ यूरोपियन यूनियन और विश्व बैंक से ग्रांट भी मिल रही है। जिसे वापस नहीं करना। जितना लोन पर ब्याज लगेगा उतनी ग्रांट भी मिल रही है। पूरे प्रोजेक्ट को खत्म करना हल नहीं है अगर प्रोजेक्ट की लागत बढ़ रही है तो फंड केंद्र सरकार से मांगना चाहिए। शहर की अधिकतर पाइपलाइन बदलने वाली है।
प्रोजेक्ट खारिज करते हैं तो भी पाइप लाइन दो चार साल में बदलनी ही होगी। यह देखा जाए कि क्या फिर निगम अपने खर्च पर इन्हें बदल पाएगा। गुरप्रीत गाबी नेे कहा कि अगर प्रोजेक्ट में पाइपलाइन बदली जाती हैं तो ठीक है। इसका अनुमानित खर्च तैयार किया जाए। पाइप की ग्राउंड स्तर पर हालत की जांच के बाद पांच, 10, 20 वर्ष में बदले जाने के हिसाब से काम हो।
डीपीआर पर उठे सवाल
2019 में प्रोजेक्ट की जो डीपीआर बनी थी उसमें केवल 244 किलोमीटर पाइपलाइन बदली जानी है। जबकि कुल पाइपलाइन 1013 किलोमीटर है। साथ ही पाइपलाइन बदलने के बाद टूटी सड़क कौन बनाएगा यह भी प्रविधान नहीं है। ऐसी ही कई खामियां डीपीआर में है। इस पर सदन में जवाब मांगा गया गलत डीपीआर बनाने वाले अधिकारियों पर सवाल उठे। हालांकि अब उन अधिकारियों में से अधिकतर चंडीगढ़ में कार्यरत नहीं हैं।
अभी परियोजना अस्थाई रूप से बंद
17 सितंबर 2025 को एजेंस आफ फ्रांस डी डेवलपमेंट (एएफडी) ने परियोजना गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोक दिया था। नगर निगम से आवश्यक स्पष्टीकरण मांगे गए। 24 अक्टूबर 2025 को निगम को एएफडी की तरफ से दोबारा रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है। इसका जवाब अभी तक नहीं दिया गया। अगर परियोजना को रद करते हैं तो भी निगम को लोन पर ढाई प्रतिशत जुर्माना करीब 15.15 करोड़ और लांग टर्म टेक्निकल असिस्टेंट एजेंसी की 4.58 करोड़ की पेमेंट देनी होगी।

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