जेएनएन, चंडीगढ़। केंद्र सरकार ने काली सूची से पंजाब से संबंधित 274 नाम हटा दिए हैं। पहले इस लिस्ट में 314 लोगों के नाम थे। अब मात्र 40 नाम ही रह गए हैं। वहीं, अब काली सूची में शामिल लोगों के परिजन भी भारत आ सकेंगे। यह जानकारी शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष व फिरोजपुर के सांसद सुखबीर सिंह बादल ने दी। उन्होंने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने न सिर्फ काली सूची को छोटा किया है, बल्कि नियमों में भी बदलाव किया है। 

सुखबीर ने बताया कि एक सूची केंद्रीय गृह मंत्रालय बनाता था और एक सूची विभिन्न देशों के दूतावास भी बनाते थे। केंद्र सरकार की काली सूची में 314 नाम थे, जबकि दूतावासों के लिस्ट काफी लंबी होती थी। इस लिस्ट में उन लोगों को भी शामिल कर लिया जाता था, जिन्होंने विदेश में कोई गड़बड़ी की होती थी। बादल ने बताया कि इस बारे में शिअद का एक शिष्टमंडल प्रधानमंत्री से मिला था। इसके बाद केंद्र सरकार ने दूतावासों की लिस्ट को खारिज कर दिया है। वहींं, गृह मंत्रालय की लिस्ट से भी 274 नाम हटा दिए हैं।

उन्होंने बताया कि पहले काली सूची में शामिल व्यक्ति के परिजनों को भी भारत आने की इजाजत नहीं थी। केंद्र सरकार ने इस नियम में भी छूट दे दी है। अब काली सूची में शामिल लोगों के परिजन भारत आ सकते हैं। उन्होंने नियमों में बदलाव के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि विदेश में रहने वाले अप्रवासी भारतीयों की यह बहुत पुरानी मांग थी जो अब पूरी हुई है। वहीं, 1984 के सिख विरोधी दंगों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 150 केस बंद कर दिए थे। उन्हें अब दोबारा खोल दिया गया है।

क्या होती है काली सूची

देश के विरुद्ध साजिश रचने या देश विरोधी गतिविधियां करने वाले विदेश में बैठे लोगों के नाम काली सूची में शामिल होते हैं। इस लिस्ट में शामिल लोगों को देश में आने की इजाजत नहीं होती है। केंद्र सरकार समय-समय पर इस सूची को रिव्यू करती रहती है। इसमें ज्यादातर नाम तब के हैं जब पंजाब में आतंकवाद चरम पर था।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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