चंडीगढ़ [सुमेश ठाकुर]। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने एससी-एसटी स्टूडेंट्स की एग्जामिनेशन फीस को कम किया है लेकिन उसका लाभ चंडीगढ़ के स्कूलों में पढ़ने वालों को नहीं मिलेगा। यह लाभ मात्र दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को मिलेगा। सीबीएसई की तरफ से अगस्त के दूसरे सप्ताह में बोर्ड क्लासों की एग्जामिनेशन फीस से लेकर एडमिशन फीस में बढ़ोतरी की गई है। बोर्ड की तरफ से एग्जामिनेशन फीस को पांच सौ से 15 सौ कर दिया है।

वहीं, दिल्ली में एससी-एसटी स्टूडेंट्स को यह फीस 12 सौ रुपये अदा करनी होगी। शहर के सरकारी स्कूलों में 40 प्रतिशत बच्चे एससी-एसटी कोटे के पढ़ाई कर रहे हैं। यदि बात करें दसवीं और बारहवीं कक्षा के स्टूडेंट्स की तो करीब आठ हजार स्टूडेंट्स एससी-एसटी कोटे में पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन उन्हें जनरल कैटेगरी के समान 15 सौ रुपये ही एग्जामिनेशन फीस अदा करनी होगी। यह सर्कुलर सभी सरकारी स्कूलों को प्राप्त हो चुका है। नवंबर-दिसंबर 2019 में एग्जामिनेशन फीस जमा होगी और मार्च 2020 में एग्जाम होंगे। शहर के एससी-एसटी मोर्चा के लोगों संग 1996 से भेदभाव हो रहा है।

चंडीगढ़ प्रशासन ने 23 साल से फ्रेश सर्टिफिकेट बनाने पूरी तरह से बंद कर दिए हैं। जब किसी के पास सर्टिफिकेट नहीं होंगे तो वह लाभ कैसे ले सकते हैं। दिल्ली में भी 38 कम्युनिटी को एससी-एसटी कोटे में शामिल किया गया है। वहीं कम्युनिटी चंडीगढ़ में भी हैं और उन्हें इस कोटे में शामिल किया गया है। ऐसे में दिल्ली के स्टूडेंट्स को फीस का लाभ देना और चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स को नहीं देना पूरी तरह से गलत है। -सतीश कैंथ, पार्षद व अनुसूचित जाति के नेता

नियम पूरे देश में एक जैसा होना चाहिए। जो अधिकार दिल्ली के एससी-एसटी को मिल रहे हैं, वही यूटी होने के नाते शहर के बच्चों को भी मिलने चाहिए। सीबीएसई से मांग करेंगे कि एग्जामिनेशन फीस के मामले में पूरे देश के स्टूडेंट्स के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाए। -नरेंद्र चौधरी, प्रेसिडेंट, दलित रक्षा दल

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