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चंडीगढ़ निगम में भ्रष्टाचार, रिश्वत बंटवारे में सेनिटरी इंस्पेक्टर से लेकर ज्वाइंट कमिश्नर का नाम; CBI जांच शुरू

By Ravi Atwal Edited By: Sohan Lal
Published: Fri, 09 Oct 2026 01:06 PM (IST)

चंडीगढ़ नगर निगम में रिश्वतखोरी के मामले में सीबीआई जांच बड़े अधिकारियों तक पहुंच गई है। ठेकेदार की शिकायत पर ...और पढ़ें

नगर निगम में 14 लाख की रिश्वत के खेल में अब बड़े अफसरों पर भी जांच की आंच पहुंची। (सांकेतिक फोटो)

नगर निगम में 14 लाख की रिश्वत के खेल में अब बड़े अफसरों पर भी जांच की आंच पहुंची। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. चंडीगढ़ निगम रिश्वत मामले में बड़े अधिकारियों पर जांच की आंच।

  2. शिकायतकर्ता ने ज्वाइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह का नाम लिया।

  3. सेनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा रिश्वत लेते गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। नगर निगम में 14 लाख की रिश्वत के खेल में अब बड़े अफसरों पर भी जांच की आंच पहुंच गई है। डंपिंग ग्राउंड में जेसीबी से सफाई का काम करवाने वाले ठेकेदार ने सीबीआई को दी शिकायत में सेनिटरी इंस्पेक्टर से लेकर ज्वाइंट कमिश्नर पीसीएस बलबीर राज सिंह का भी नाम ले दिया है।

ठेकेदार प्रशांत भदौरिया का कहना है कि उनके बिल क्लियर करवाने के नाम पर सेनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा ने उससे 14 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। शक्ति का कहना था कि यह रकम ऊपर तक पहुंचाई जानी है।

भदौरिया ने जब शक्ति की शिकायत ज्वाइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह से की तो उन्होंने भी आगे से कह दिया कि रिश्वत तो देनी ही पड़ेगी, वरना उनकी पेमेंट रोक दी जाएगी और टेंडर भी रद हो जाएगा।

उनकी शिकायत पर सीबीआई ने सेनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा को तो गिरफ्तार कर लिया, अब बाकी अफसरों की मिलीभगत की जांच की जा रही है। भदौरिया ने अपनी शिकायत में कहा कि रिश्वत की रकम शक्ति शर्मा के अलावा एक अन्य सेनिटरी इंस्पेक्टर नितिन, चीफ सेनिटरी इंस्पेक्टर कुलबीर, एसएएस अकाउंट्स संदीप सेठी और ज्वाइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह के बीच बंटनी थी।

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। सीबीआइ ने बुधवार को शक्ति शर्मा को सेक्टर-11 की मार्केट में कार के अंदर ठेकेदार से पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। वीरवार को उसे सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

हर महीने मांगे एक लाख रुपये

शिकायत के अनुसार, प्रशांत भदौरिया की फर्म को मार्च 2026 में नगर निगम ने विभिन्न लैंडफिलिंग साइट पर जेसीबी और टिप्पर उपलब्ध कराने का तीन साल का टेंडर दिया था। फर्म का औसतन करीब 10 लाख प्रतिमाह का बिल बनता था।

ठेकेदार का आरोप है कि जुलाई 2025 से ही शक्ति शर्मा उससे हर महीने एक लाख रुपये रिश्वत मांग रहा था। इस कारण उसके बिल भी रोक दिए जाते थे। प्रशांत ने आरोप लगाया कि उसने शक्ति शर्मा की रिश्वत की मांग की जानकारी ज्वाइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह और अकाउंट सेक्शन के अधिकारी संदीप सेठी को भी दी थी।

शिकायतकर्ता ने बताया कि जब शिकायत देने के लिए बलबीर राज सिंह के पास पहुंचे तो उन्होंने भी आगे से कह दिया कि रिश्वत तो देनी पड़ेगी। ऐसे में उन्होंने इस मामले में सीबीआइ को सूचना दे दी। सीबीआई ने शिकायत को वेरिफाई किया और फिर आरोपित सैनिटरी इंस्पेक्टर को पकड़ने के लिए ट्रैप लगाया।

पूरे प्रोजेक्ट की जांच करेगी सीबीआई

डंपिंग ग्राउंड से कचरा उठाने और उसके निपटारे पर नगर निगम अब तक करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। यहां एक दर्जन से अधिक जेसीबी और टिप्पर काम कर रहे हैं।

सीबीआई अब रिश्वत की मांग के साथ ही इस काम के टेंडर की प्रक्रिया, भुगतान, अटेंडेंस और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर सकती है। काॅल डिटेल और दस्तावेजों की जांच से यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रिश्वत की मांग केवल शक्ति शर्मा तक सीमित थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था।'