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देश भगत यूनिवर्सिटी के मालिक, पत्नी और बेटे को बड़ी राहत; 18 करोड़ फ्रॉड केस में CBI की कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल

Published: Mon, 31 Aug 2026 03:41 PM (IST)

देश भगत यूनिवर्सिटी के मालिक डॉ. जोरा सिंह, उनकी पत्नी और बेटे को 18 करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले में ...और पढ़ें

देश भगत यूनिवर्सिटी के मालिक डॉ. जोरा सिंह।

देश भगत यूनिवर्सिटी के मालिक डॉ. जोरा सिंह।

HighLights

  1. आसरा फाउंडेशन पर बैंकों से धोखाधड़ी के आरोप थे।

  2. 2026 में सीबीआई दिल्ली में एफआईआर दर्ज की थी।

  3. सीबीआई को इस मामले में पर्याप्त सबूत नहीं मिले।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। करीब 18.53 करोड़ रुपये के कथित बैंक फ्रॉड मामले में पंजाब के फतेहगढ़ साहिब स्थित देश भगत यूनिवर्सिटी के मालिक डॉ. जोरा सिंह, उनकी पत्नी तेजिंदर कौर और बेटे संदीप सिंह को बड़ी राहत मिली है।

मामले की जांच कर रही सीबीआई दिल्ली ने चंडीगढ़ जिला अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल कर दी है। इन तीनों के खिलाफ जनवरी 2026 में सीबीआई दिल्ली में एफआईआर दर्ज की थी।

एफआईआर में इनकी आसरा फाउंडेशन पर बैंकों से धोखाधड़ी के आरोप थे, लेकिन सीबीआई को इस मामले में पर्याप्त सबूत नहीं मिले। हालांकि कैंसिलेशन रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय अदालत को करना है। यह मामला चंडीगढ़ में शिक्षण संस्थान चलाने वाली आसरा फाउंडेशन से जुड़ा है।

कैनरा बैंक की शिकायत के आधार पर सीबीआई आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। बैंक की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फाउंडेशन को वर्ष 2013 में विभिन्न क्रेडिट सुविधाएं दी गई थीं।

बैंक का आरोप था कि वित्त वर्ष 2014-15 में करीब सात करोड़ रुपये की राशि उस उद्देश्य के अलावा अन्य कार्यों में इस्तेमाल की गई, जिसके लिए लोन स्वीकृत हुआ था। साथ ही फाउंडेशन पर वास्तविक आय से अधिक राजस्व दिखाने का आरोप भी लगाया गया था।

हाईकोर्ट से भी मिल चुकी है राहत

इस मामले में फाउंडेशन को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से भी राहत मिल चुकी है। बैंक ने दो साल पहले फाउंडेशन का खाता फ्रॉड घोषित किया था। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि बैंक ने जिस फाॅरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर खाते को फ्रॉड घोषित किया, उसकी पूरी प्रति संबंधित पक्ष को उपलब्ध नहीं कारवाई गई।

ऐसे में हाईकोर्ट ने केनरा बैंक के आसरा फाउंडेशन के खाते को फ्रॉड घोषित करने के आदेश को रद कर दिया। इसके बाद सीबीआई ने भी केस में खत्म कर दिया। सीबीआई को जांच के दौरान केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले।