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चंडीगढ़ में भ्रष्टाचार केस में आरोपित चार पुलिसकर्मियों को कैट से राहत, बर्खास्तगी के आदेश रद

Published: Thu, 10 Sep 2026 08:04 PM (GMT+05:30)

चंडीगढ़ कैट ने भ्रष्टाचार के मामलों में बर्खास्त चार पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी के आदेश रद कर दिए हैं। कैट ने ...और पढ़ें

पुलिसकर्मियों को बर्खास्त किए जाने का एसएसपी के आदेश रद।  (सांकेतिक फोटो)

पुलिसकर्मियों को बर्खास्त किए जाने का एसएसपी के आदेश रद। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. कैट ने चार बर्खास्त पुलिसकर्मियों की सेवा बहाली का आदेश दिया।

  2. बिना विभागीय जांच के बर्खास्तगी को नियम विरुद्ध बताया।

  3. आपराधिक मामलों पर कैट के इस फैसले का असर नहीं होगा।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। भ्रष्टाचार के मामलों में बर्खास्त चार पुलिसकर्मियों सब इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह, कृष्ण कुमार, एएसआई हरमीत सिंह और अख्तर हुसैन को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की चंडीगढ़ बेंच से बड़ी राहत मिली है।

कैट ने चारों पुलिसकर्मियों को बर्खास्त किए जाने के चंडीगढ़ एसएसपी के आदेश को रद कर दिया है। इन चारों को अलग-अलग समय पर सीबीआई ने रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

अख्तर और कृष्ण कुमार को सीबीआई ने 2023 में पकड़ा था जबकि अगले साल एक अलग केस में हरमीत सिंह और बलविंदर सिंह पकड़े गए। इन चारों को गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग ने बर्खास्त कर दिया था। बर्खास्तगी के आदेश को उन्होंने कैट में चुनौती दी थी।

इनके वकील रोहित सेठ ने याचिका में कहा कि इन्हें बिना विभागीय जांच के सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था जोकि नियमों के खिलाफ है। कैट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि पुलिस विभाग यह साबित नहीं कर पाया कि जिस समय इन्हें बर्खास्त किया गया, उस समय ऐसी परिस्थितियां थीं जिनमें डिपार्टमेंटल इंक्वायरी कराना संभव नहीं था।

विभाग ने इन पुलिसकर्मियों पर लगे आरोपों की गंभीरता तो बताई लेकिन यह बताने के लिए कोई ठोस आधार नहीं दिया कि इंक्वायरी कराने में वास्तव में क्या परेशानी थी।

क्रिमिनल केस पर इस आदेश का नहीं होगा असर

कैट ने साफ किया कि इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीबीआई कोर्ट में चल रहे आपराधिक मामले के फैसले पर इस आदेश का कोई असर नहीं होगा। हालांकि कैट ने बर्खास्तगी के फैसले को रद करते हुए पुलिस विभाग को सर्विस रूल्स के मुताबिक आगे कार्रवाई की छूट दी है।

रीइंस्टेटमेंट, सर्विस कंटीन्यूटी, अन्य बेनिफिट और बर्खास्तगी के बीच की अवधि को सर्विस में किस तरह माना जाएगा, इस पर सक्षम अथारिटी को तीन महीने के भीतर फैसला करना होगा।