11 साल रोकी रिटायर्ड डॉक्टर की ग्रेच्युटी, अब देना होगा 7 प्रतिशत ब्याज; पंजाब सरकार को कैट का आदेश
पंजाब सरकार को कैट चंडीगढ़ बेंच से झटका लगा है, जिसमें उसे सेवानिवृत्त डॉ. डीएस जसपाल की 11 साल से ...और पढ़ें

ग्रेच्युटी पर सात प्रतिशत ब्याज का तीन महीने में करना होगा भुगतान। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
ब्याज देने से इनकार वाला पंजाब सरकार का आदेश रद।
डॉ. डीएस जसपाल की 11 साल से रोकी गई ग्रेच्युटी।
सरकार को तीन महीने में ब्याज सहित भुगतान करना होगा।
-वर्ष 2011 में पंजाब के प्रधान सचिव के पद पर रिटायर हुए थे डीएस जसपाल
-जसपाल ने ग्रेच्यूटी पर मांगा था ब्याज, सरकार ने इनकार किया तो पहुंचे कैट
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पंजाब सरकार को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की चंडीगढ़ बेंच से बड़ा झटका लगा है। वर्ष 2011 में प्रधान सचिव के पद पर रिटायर हुए डाॅक्टर डीएस जसपाल को पहले तो सरकार ने 11 साल व आठ महीने की देरी से ग्रेच्युटी जारी की। फिर उस पर ब्याज अदा करने से इनकार कर दिया।
कैट ने जसपाल की याचिका पर पंजाब सरकार को उनकी 10 लाख रुपये की ग्रेच्युटी पर सात प्रतिशत ब्याज अदा करना होगा। बेंच ने पंजाब सरकार का ब्याज देने से इनकार करने वाला आदेश रद कर दिया है। कैट ने उनकी सेवानिवृत्ति के तीन महीने बाद से 15 मार्च 2023 तक ब्याज की गणना कर तीन महीने के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
2011 में सेवानिवृत्त, 2023 में मिली ग्रेच्यूटी
जसपाल 31 दिसंबर 2011 को पंजाब सरकार के प्रधान सचिव पद से रिटायर हुए थे। उनके अनुसार, सेवानिवृत्ति के समय उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई लंबित नहीं थी।
हालांकि, परिवहन विभाग में उनके कार्यकाल से संबंधित आरोपों को लेकर 18 अप्रैल 2015 को चार्जशीट जारी की गई। इस कार्रवाई को केंद्र सरकार की सहमति के बाद 26 अक्टूबर 2022 को पंजाब सरकार ने समाप्त कर दिया।
इसके बाद अकाउंटेंट जनरल, पंजाब ने 15 मार्च 2023 को 10 लाख रुपये की ग्रेच्यूटी जारी की, लेकिन विलंबित भुगतान पर ब्याज नहीं दिया। उन्होंने कई बार आवेदन भी किया, लेकिन सरकार ने इनकार कर दिया। आखिर में उन्होंने सरकार के खिलाफ कैट में याचिका दायर कर दी।
सरकार ने रिकवरी लंबित होने का दिया तर्क
सरकार ने कैट में दलील दी कि सेवानिवृत्ति के समय कुछ विभागीय रिकवरी लंबित थी। इसमें रोड सेफ्टी काउंसिल और पीआरटीसी से संबंधित खरीदे गए कार्यालय के सामान का मामला शामिल था। सरकार के अनुसार, इसी कारण ग्रेच्यूटी जारी नहीं की गई।
हालांकि कैट ने फैसले में कहा कि सेवानिवृत्ति के समय कोई विभागीय कार्रवाई लंबित नहीं थी। तीन साल से अधिक समय बाद जारी चार्जशीट और उसके बाद कार्रवाई समाप्त होने की स्थिति में पूरी अवधि की ग्रेच्युटी रोकने को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
