चंडीगढ़, [इन्द्रप्रीत सिंह]। पंजाब में एक बार फिर चुनावी घमासान मचने वाला है। लोकसभा चुनाव के बाद खाली हुई विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की नजर है। मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की खास नजर सुखबीर सिंह बादल के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उनकी विधानसभा सीट जलालाबाद पर है। कैप्‍टन किसी भी कीमत पर यह सीट शिरोमणि अकाली दल से छीनना चाहते हैं। इसके साथ ही भुलत्थ, मानसा व फगवाड़ा सीटों से टिकट के लिए भी कांग्रेस नेताओं में हो़ड़ मची हुई है। इन सीटों पर कांग्रेस का कब्‍जा नहीं था।

लोकसभा चुनाव के बाद खाली assembly सीटों पर कांग्रेस में होड़

आम आदमी पार्टी के मानसा से विधायक नाजर सिंह मानशाहिया के कांग्रेस में शामिल होने से यह सीट खाली हुई। इस सीट पर पूर्व विधायक मंगत राम बंसल की पत्‍नी मनोज बाला टिकट हासिल करना चाहती हैं। वह अपना टिकट पक्की करने के लिए मुख्यमंत्री आफिस में भी कई चक्कर लगा चुकी हैं। वह खुद को मजबूत दावेदार बता रही हैं। दूसरी ओर कहा जा रहा है कि मानशाहिया को कांग्रेस में इसी शर्त पर लाया गया है कि उन्हें यहां से टिकट दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के बेटे रणइंद्र सिंह का भी नाम इस सीट के लिए चर्चा में है।

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बठिंडा जिले की मौड़ सीट हालांकि अभी खाली घोषित नहीं की गई है लेकिन इस सीट पर भी टिकट के लिए प्रयास शुरू हो गए हैैं। यहां से आम आदमी पार्टी के विधायक जगदेव सिंह कमालू के सुखपाल सिंह खैहरा के ग्रुप में शामिल होने के चलते राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि इस सीट को भी खाली घोषित किया जाएगा। इस सीट पर टिकट के लिए कांग्रेसियों के तीन-तीन ग्रुप नजर जमाए हुए हैं। सबसे पहला हक हरमिंदर सिंह जस्सी जता रहे हैं जो इस सीट पर पिछले चुनाव में भी खड़े थे। इसके अलावा उनके एक नजदीकी रिश्तेदार भी इस सीट से टिकट हासिल करने के लिए प्रयासरत हैं। उन्हें अक्सर सीएमओ में देखा जा सकता है। यह भी बताया जाता है कि दोनों की आपस में नहीं बनती। इसके अलावा वित्तमंत्री मनप्रीत बादल भी इस सीट पर अपना दखल बनाए हुए हैैं। वह यहां से 2012 में चुनाव लड़ चुके हैैं।

फगवाड़ा से भाजपा विधायक सोम प्रकाश के सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हो गई है। भुलत्थ से विधायक सुखपाल खैहरा विधायक पद से इस्तीफा दे चुके हैैं और अपनी नई पार्टी बना चुके हैैं। कांग्रेस की इन दाेनों सीटों पर भी खास निगाह है और वह इसे हासिल करना चाहती है1

इसलिए है टिकट पाने की होड़

उल्लेखनीय है कि मौजूदा कैप्टन सरकार के कार्यकाल को अभी ढाई साल पड़े हैं। कांग्रेसियों को लग रहा है कि प्रदेश में पार्टी की सरकार होने के चलते उपचुनाव में उनकी जीत सुनिश्चित है। ऐसे में सभी नेता टिकट पाने की दौड़ में लगे हुए हैं। अपनी सीटें हार चुके उम्मीदवारों को एक बार फिर से विधायक बनने की आस जगी हुई है।

कैप्टन अमरिंदर ने मंत्रियों को जलालाबाद व फगवाड़ा में सक्रियता बढ़ाने को कहा

सुखबीर सिंह बादल के सांसद बनने के बाद खाली हुई जलालाबाद विधानसभा सीट हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अभी से रणन‍ीति बनानी शुरू कर दी है। वह बादल परिवार को उसके गढ़ में हराकर अपने विरोधियों के इस आरोप की हवा निकालना चाहते हैं कि वह बादल पिता-पुत्र से मिले हुए हैं। उन्होंने अपने भरोसेमंद मंत्रियों को कहा है कि वे जलालाबाद और आसपास फाजिल्का व फिरोजपुर में अपनी सरगर्मी बढ़ाएं।

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कैप्टन के एक नजदीकी मंत्री ने बताया कि सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू, शिक्षा मंत्री विजयइंद्र सिंगला, पंचायत मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, स्थानीय निकाय मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा, सिंचाई मंत्री सुख सरकारिया, राजस्व मंत्री गुरप्रीत कांगड़, जेल मंत्री सुखजिंदर रंधावा और खेल मंत्री राणा गुरमीत सोढ़ी को इस बारे में कैप्टन ने निर्देश दिए हैैं। उन्होंने कहा है कि मंत्री जलालाबाद और फगवाड़ा विधानसभा हलकों के अलावा मानसा व रोपड़ विधानसभा हलकों में भी अपनी सरगर्मियां बढ़ाएं जिससे मतदान से पहले कांग्रेसी वर्करों और लोगों के साथ संपर्क बढ़ाया जा सके।

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दूसरी ओर विधानसभा के स्पीकर राणा केपी सिंह जलालाबाद व फगवाड़ा विधानसभा सीटें खाली होने का पत्र चुनाव आयोग को भेज चुके हैैं। प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी एस. करुणा राजू का कहना है कि अक्टूबर में चुनाव हो सकते हैैं क्योंकि हरियाणा में भी इसी माह चुनाव होने की संभावना है।

जाखड़ को लड़ाना चाहते हैैं चुनाव

कैप्टन खेमे के कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जलालाबाद सीट पर मुख्यमंत्री प्रदेश कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ को जितवाकर मंत्री बनाने को सोच रहे हैैं। हाईकमान के पास भी इस संबंध में बात की है। दूसरी तरफ जाखड़ कोई भी चुनाव लडऩे के इच्छुक नहीं हैैं और कैप्टन को भी उन्होंने बता दिया है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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