कैलाश नाथ, चंडीगढ़। पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के मंत्रियों के शपथ ग्रहण से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह समर्थक विधायकों ने तेवर दिखाए। पूर्व कैबिनेट मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू और गुरप्रीत कांगड़ ने कहा कि जज भी फांसी की सजा देने से पहले अंतिम इच्छा पूछ लेता है, लेकिन पार्टी ने मंत्री पद से हटाने से पहले एक बार भी नहीं पूछा। उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान बताए कि उनकी गलती क्या है। इतना कहते-कहते बलबीर सिंह सिद्धू का न सिर्फ गला भर आया बल्कि आंखों से आंसू भी छलक गए। वहीं, पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने कहा कि पार्टी में सबको जिम्मेदारी मिलेगी।

रुंधे हुए गले से सिद्धू ने कहा, उन्हें मंत्री पद से हटाए जाने का कोई गम नहीं है। पार्टी अगर उनसे कह देती तो वह खुद इस्तीफा देने के लिए जाते लेकिन जिस प्रकार से उन्हें जलील किया गया है, वह बर्दाश्त नहीं होता है। गुरप्रीत कांगड़ ने भी कमोवेश यही कहा। बता दें कि दोनों ही मंत्री कैप्टन के करीबी माने जाते थे। शनिवार को कैबिनेट की लिस्ट से नाम कटने पर दोनों ही मंत्री खुलकर सामने आ गए। वहीं, कैप्टन के खेमे में शामिल सुखपाल खैहरा, नवतेज चीमा आदि ने कैबिनेट मंत्री बने राणा गुरजीत सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला।

उक्त नेताओं ने तो राणा गुरजीत सिंह को कैबिनेट में शामिल नहीं किए जाने की मांग को लेकर पार्टी के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से भी पटियाला में मुलाकात की। अहम पहलू यह है कि जिस प्रकार से कैप्टन समर्थक विधायकों ने अपना रुख दिखाया है उससे इस बात के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं कि भले ही अंतरकलह को खत्म करने के लिए पार्टी ने सरकार व संगठन का चेहरा बदल दिया हो, लेकिन कांग्रेस का अंतरकलह खत्म नहीं हुआ है।

वहीं, मंत्री पद से हटाए जाने के बाद बलबीर सिंह सिद्धू खुलकर पहली बार गंभीर विषयों पर भी बोले। कोविड के दौरान फतेह किट और कोरोना वैक्सीन को प्राइवेट अस्पतालों को बेचने के मुद्दे पर उन्होंने सीधे-सीधे पूर्व चीफ सेक्रेटरी विनी महाजन को जिम्मेदार ठहरा दिया। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोविड को लेकर जब पहली बार बैठक हुई तभी हरेक प्रकार की खरीद के लिए मुख्यमंत्री ने विनी महाजन की अगुवाई में कमेटी बना दी थी। अत: इसका जवाब विनी महाजन, डा. केके तलवाड़ या विकास गर्ग दे सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कोई भी खरीद नहीं की।

बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को पार्टी ने मुख्यमंत्री बनाया, वह उनके साथ चले। उसमें उनका क्या कसूर है। सिद्धू ने कहा कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल को पत्र लिखा है। वहीं, कांगड़ ने कहा कि उनके परिवार के चार लोगों की हत्या हो चुकी है। पार्टी के लिए उनका पूरा परिवार खड़ा रहा है। वह जिस हलके (रामपुरा फूल) से आते हैं, वहां पर बिक्रम सिंह मजीठिया की नजर है। अगर उन्हें कमजोर किया जाता है तो पार्टी मजबूत कैसे हो जाएंगी।

सभी को दी जाएगी जिम्मेदारी

कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश रावत से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी ने तय किया है कि जिन्हें कैबिनेट में स्थान नहीं मिला है, उन्हें पार्टी की जिम्मेदारी दी जाएगी। किसी को भी छोड़ा नहीं गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि नई कैबिनेट में सामाजिक व क्षेत्रीय संतुलन भी बैठाया गया है। राणा गुरजीत सिंह के मुद्दे पर रावत ने कहा कि विभाग ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। जिसके बाद राणा गुरजीत सिंह के ऊपर कोई दाग नहीं था, इसलिए उन्हें कैबिनेट में स्थान दिया गया है। कैप्टन को लेकर रावत ने कहा कि उन्हें मना लिया जाएगा और रास्ता निकाल लिया जाएगा।

कैप्टन और जाखड़ नहीं दिखे समारोह में

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी से नाराज चल रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह रविवार को शपथ ग्रहण समारोह में नहीं पहुंचे। वह कांग्रेस से नाराज चल रहे हैं। इसी प्रकार कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ ने भी आज के समारोह से खुद को दूर रखा। जाखड़ हालांकि मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में दिखाई दिए थे, लेकिन आज वह राजभवन नहीं पहुंचे।

नागरा पड़ गए अकेले

कांग्रेस के कार्यकारी प्रधान कुलजीत नागरा का नाम अंतिम समय में कैबिनेट मंत्रियों के लिस्ट से आउट हो गया। उनके स्थान पर काका रणदीप सिंह नाभा शामिल हो गए। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि पार्टी नाभा को एडजस्ट करना चाहती थी। क्योंकि वह चार बार विधायक रह चुके हैं और वरिष्ठ नेता है। ऐसे में किसे ड्राप किया जाए इसे लेकर पेंच फंसा हुआ था।

सूत्र बताते हैं कि मनप्रीत बादल अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को कैबिनेट में नहीं आने देना चाहते थे, क्योंकि दोनों ही नेताओं के बीच छत्तीस का आंकड़ा है, लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू ने वडिंग को लेकर स्टैंड लिया। सिद्धू ने गुरकीरत कोटली के लिए भी स्टैंड लिया, क्योंकि कोटली पूर्व सीएम स्व. बेअंत सिंह के पोते हैं और पंजाब के हिंदुओं में बेअंत सिंह के लिए सम्मान है। हालांकि नागरा के लिए पार्टी में किसी ने स्टैंड नहीं लिया। नागरा भले ही राहुल गांधी के गुड बुक में हैं, लेकिन पंजाब के किसी भी नेता ने उनके लिए स्टैंड नहीं लिया।

Edited By: Kamlesh Bhatt