चंडीगढ़, [विशाल पाठक]। केंद्र सरकार की ओर से रेल बजट में एक बार फिर चंडीगढ़ को बुलेट ट्रेन का जुमला थमा दिया गया है। सरकार ने शनिवार को जो बजट पेश किया है। उसमें चंडीगढ़ के लिए रेल बजट के तहत नई बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणा की है। यह बुलेट ट्रेन दिल्ली-चंडीगढ़-लुधियाना-जालंधर-अमृतसर सेक्शन पर चलाई जाएगी। हाल ही में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने इसकी घोषणा की थी। दिल्ली-चंडीगढ़-लुधियाना-जालंधर-अमृतसर सेक्शन पर बुलेट ट्रेन चलाने के लिए बजट में छह महीने के अंदर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए कहा है।

इस प्रोजेक्ट पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रेल बजट में पूरे देश में दिल्ली-चंडीगढ़-लुधियाना-जालंधर-अमृतसर सेक्शन समेत छह रेल कॉरिडोर पर बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणा की गई है। लेकिन हकीकत इसके विपरित है। चंडीगढ़ से तेजस ट्रेन चलाने की घोषणा को चार बीत चुके हैं। जबकि चंडीगढ़ से तेजस ट्रेन चलाने के लिए वर्ष 2016 में नाॅर्दन रेलवे की ओर से शेड्यूल भी जारी कर दिया गया था। लेकिन अभी तक चंडीगढ़ से तेजस ट्रेन नहीं चल सकी। ऐसे में अब चंडीगढ़ को बजट में एक बार फिर बुलेट ट्रेन चलाने का जुमला थमा दिया गया है।

वर्ष 2016 में जब चंडीगढ़ से तेजस ट्रेन चलाने की घोषणा की गई थी। उस समय खुद नार्दन रेलवे ने चंडीगढ़ से बुलेट ट्रेन चलाने के प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। क्योंकि इस प्रोजेक्ट पर लागत बहुत आ रही थी। साथ ही चंडीगढ़ से अंबाला के बीच बुलेट ट्रेन के लिए रेल लाइन बिछाने के लिए कई तकनीकी खामिया भी सर्वे रिपोर्ट में सामने आई थी।

पहले बुलेट ट्रेन चलाने का प्रस्ताव इसलिए हुआ था खारिज

वर्ष 2015 में नार्दन रेलवे की ओर से चंडीगढ़ से सेमी बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद रेलवे के टेक्निकल एक्सपर्टस और इंजीनियर्स ने चंडीगढ़ से नई दिल्ली के बीच रेलवे ट्रैक की जांच की थी। इसमें यह खुलासा हुआ था कि चंडीगढ़ से अंबाला के बीच कुछ छोटे व बड़े करीब 22 मोड़ हैं। जोकि तकनीकी लिहाज से सेमी बुलेट या बुलेट ट्रेन चलाने के लिए सहीं नहीं है। क्योंकि बुलेट ट्रेन की स्पीड 200 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से ज्यादा होती है। ऐसे में चंडीगढ़ से अंबाला के बीच इन 22 खतरनाक मोड़ के कारण यह प्रपोजल ड्रोप कर दिया गया था। अब एक बार फिर रेलवे बोर्ड ने हवा में दिल्ली-चंडीगढ़-लुधियाना-अमृतसर रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने का फैसला किया है। जिसकी स्पीड 200 किलोमीटर प्रति घंटा से ऊपर होगी।

2016 में हुई थी तेजस चलाने की घोषणा

वर्ष 2016 में पूर्व रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने चंडीगढ़-दिल्ली रूट पर तेजस शुरू करने का एलान किया था। इसके लिए 2017 में विंटर शेड्यूल में एक नवंबर से तेजस की टाइमिंग भी आ गई थी। लेकिन यह अभी तक चली नहीं है। क्योंकि चंडीगढ़ से अंबाला के बीच जो रेल ट्रैक हैं, वह तेजस की स्पीड को देखते हुए सक्षम नहीं है। अभी देशभर में जिन रूट पर तेजस चलाई जा रही है। उन रूट पर तेजस ट्रेन को 160 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चलाया जा रहा है। ऐसे में चंडीगढ़ से अंबाला के बीच जो रेल ट्रैक हैं, उस पर ट्रेन की 70 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड ही रहती है। अंबाला के बाद ही ट्रेनों की स्पीड 100 से 110 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड बढ़ाई जाती है।

इस रेल बजट में चंडीगढ़ की यह उम्मीदें नहीं हुई पूरी

  • चंडीगढ़-लखनऊ सछ्वावना सुपरफास्ट ट्रेन को वाराणसी या प्रयागराज तक चलाए जाने का मुद्दा कई बार उठाया गया। अभी तक इस ट्रेन का रूट नहीं बढ़ाया गया।
  • चंडीगढ़-नई दिल्ली की स्पीड अभी 100 से 108 किलोमीटर प्रति घंटा है, इसे 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक स्पीड बढ़ाए जाने की उम्मीद थी। ताकि कम समय में सफर तय हो सके।
  • चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन प्रोजेक्ट का काम अभी तक लटका हुआ है। हिमाचल में इस रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए अभी तक जमीन एक्वायर नहीं की जा सकी है।

रेल बजट में इस बार चंडीगढ़ से बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणा की गई है। इसके अलावा चंडीगढ़ को रेल बजट में क्या मिला है। इसकी पूरी जानकारी सोमवार तक आएगी। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर व‌र्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन प्रोजेक्ट के तहत 140 करोड़ रुपये से चार मंजिला इमारत का निर्माण कार्य जारी है।

-जीएम सिंह, डीआरएम, अंबाला रेलवे मंडल

पूर्व रेल मंत्री बोले, पूरी तरह से निराशाजनक रहा बजट

पवन कुमार बंसल, पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने बजट को लेकर प्र‍तिक्रिया देते हुए कहा कि  बजट में जिस प्रकार आज रेलवे के निजीकरण को लेकर घोषणा की गई। यह गलत हैं। पूरे देश में करीब 150 ट्रेनों को प्राइवेटाइज किया जा रहा है। रेल देश की लाइफलाइन है। यह जरूरतमंद और आम जनता का सबसे बड़ा साधन है। जिसे अब प्राइवेटाइज किया जा रहा है। जिससे ट्रेन में सफर कर महंगा हो जाएगा। यह पूरी तरह से गलत है। दूसरी तरफ अगर मैं पूरे बजट की बात करूं। इस बार का बजट पूरी तरह से निराशाजनक रहा। बजट में देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कोई रोड मैप नहीं दिखाई दिया। बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार ने बजट में कोई भी घोषणा नहीं की। देश का ग्रोथ रेट पांच प्रतिशत से नीचे चला गया है। बजट में जो इंकम टैक्स स्लैब में छूट की बात की गई है। वह लोगों के साथ धोखा है। एक हाथ से देकर सरकार ने दूसरे हाथ से वापिस ले लिया है।

 

 

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