मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

चंडीगढ़ : प्रदीप छाबड़ा पिछले साढ़े चार साल से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हैं। जिन पर इस समय शहर में पवन बंसल को चुनाव जीताने का दारोमदार है। पार्टी के पास अंतिम मौका है, जब वह शहर में अपना प्रभाव बढ़ाकर साल 2022 में फिर से नगर निगम पर कब्जा करने का सपना ले सकती है। छाबड़ा शुरू से ही पूर्व रेल मंत्री एवं कांग्रेस के उम्मीदवार पवन बंसल के करीबी रहे हैं। छाबड़ा ने छात्र राजनीति के तौर पर अपना करियर शुरू किया था, जोकि तीन बार पार्षद और एक बार नगर निगम के मेयर रह चुके हैं। पवन बंसल को फिर से उम्मीदवार बनवाने में छाबड़ा की अहम भूमिका रही है। ऐसे में वह किस तरह से वह पवन बंसल की जीत की नैया पार लगाएंगे, इस पर दैनिक जागरण के चीफ रिपोर्टर राजेश ढल्ल ने विशेष बातचीत की। पेश हैं खास अंश.. कांग्रेस को शहरवासी क्यों वोट दें

मतदाता कांग्रेस के उम्मीदवार पवन बंसल का लगातार 15 साल सांसद के तौर पर काम देख चुके हैं और पिछले पांच साल में सांसद किरण की असफलता भी देख चुके हैं। ऐसे में इस समय शहर की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए लोग कांग्रेस पार्टी को जीताना चाहते हैं। भाजपा के पास शहर में क्या किया, कुछ भी बताने के लिए नहीं है। एक भी वायदा भाजपा पूरी नहीं कर पाई है। इस समय हर कोई कह रहा है कि केंद्र में तो मोदी की सरकार बनेगी, तो ऐसे में चंडीगढ़ क्यों कांग्रेस को जीताए

ऐसा कोई सर्वे नहीं आया है कि केंद्र में मोदी की सरकार बन रही है। जबकि मोदी सरकार की असफलताएं तो चंडीगढ़ की सांसद से भी ज्यादा हैं। लोकसभा चुनाव के परिणाम आने पर यह पता चल जाएगा। अकेली कांग्रेस पार्टी ऐसी होगी, जिसके सबसे ज्यादा सांसद जीतकर आएंगे। इस समय लोकल मुद्दे हावी हैं या राष्ट्रीय

कांग्रेस अपना 70 प्रतिशत से ज्यादा चुनाव प्रचार पूरा कर चुकी है। यह बात खुलकर सामने आई है कि शहरवासी राष्ट्रीय से लोकल मुद्दों को लेकर गंभीर हैं। जिसमें शहर की सफाई व्यवस्था बिगड़ने का मामला हो या पार्किग शुल्क और टैक्स बढ़ाने का। इस समय शहर में ट्रैफिक की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं, जिस पर भाजपा ने कुछ नहीं किया है। पिछले पांच साल में भाजपा की गुटबाजी और आपसी झगड़े से शहर का निरंतर नुकसान हुआ है। चुनाव जीतने के बाद पार्टी कौन से तीन प्रमुख कामों को पहले करवाएगी और बंसल के जीतने के बाद आपका क्या रोल होगा

सफाई व्यवस्था को दुरस्त करना और जो मेट्रो का प्रोजेक्ट भाजपा ने डंप कर दिया है, उसे सिरे चढ़ाया जाएगा क्योंकि साल 2007 से लेकर 2014 तक काफी काम इस प्रोजेक्ट पर हो चुका था। लोग भी मान रहे हैं कि मेट्रो का प्रोजेक्ट शहर और आसपास के एरिया को बचा सकता है। इसके अलावा जो हाउसिग बोर्ड के मकानों में रहने वाले लोगों को मालिकाना हक दिलवाने का मामला है, उस पर प्राथमिकता के आधार पर काम किया जाएगा। चुनाव जीतने के बाद पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल के साथ मिलकर शहरवासियों के काम करवाए जाएंगे, जो पार्टी ने शहरवासियों से वायदे किए हुए हैं। आपका मुकाबला किसके साथ है

वैसे तो लोगों ने मन बना लिया है कि शहर से पवन बंसल को जीताने का, लेकिन पार्टी फिर से मुकाबला भाजपा के साथ मानकर चल रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में जो आप का प्रदर्शन था, अब वैसा नहीं होने वाला है। शहरवासी आप और उनके उम्मीदवार को समझ चुके हैं। आप का शहर से जनाधार समाप्त हो चुका है। पीएम मोदी और अमित शाह की रैली का क्या प्रभाव पड़ेगा

पांच साल पहले भी पीएम मोदी चंडीगढ़ में रैली करने के लिए आए थे। उस समय उन्होंने खेर के लिए कहा था कि वे आशा की किरण हैं। लेकिन लोगों की यह आशा निराशा में बदल गई है। इस समय लोग भाजपा से इतने निराश हैं कि वह सांसद किरण खेर को मुबंई वापस भेजना चाहते हैं। उनकी पार्टी के कार्यकर्ता भी उनके साथ नहीं हैं। इस समय शहर का हर वर्ग परेशान है, जिन पर मोदी और शाह की रैली का भी कोई असर नहीं पड़ने वाला है। महंगाई चरम सीमा पर है। जोकि भाजपा की देन है। शहरवासी तो अब मांग कर रहे हैं कि उन्हें कांग्रेस के समय के ही पुराने दिन लौटा दिए जाएं।

इस चुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा दल बदल की राजनीति की, ऐसा क्यों

असल में कुछ ऐसे नेता थे, जोकि पिछले पांच साल में कांग्रेस छोड़कर चले गए थे, असल में अधिकतर ऐसे नेताओं की घर वापसी हुई है। उन्हें पता लग गया है कि कांग्रेस ही अकेली ऐसी पार्टी है, जो शहर का विकास कर सकती है। जबकि पूर्व मेयर पूनम शर्मा जो भाजपा में शामिल हुई हैं, उन्हें सोचना चाहिए था कि पुराने लोग कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं और भाजपा कांग्रेस से शामिल होने वाले लोगों के लिए नहीं है। पूनम शर्मा को भी जल्द समझ आ जाएगा।

Posted By: Jagran

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