जेएनएन, चंडीगढ़: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को प्रदेश की जनता के लिए तुरंत एक पैकेज का एलान करना चाहिए। केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 20 लाख करोड़ का पैकेज घोषित किया है। इसका पंजाब की जनता को भी भरपूर लाभ मिलेगा। भाजपा की प्रदेश सरकारें विशेषकर कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा व गुजरात ने भी अपने प्रदेश की जनता के लिए हजारों करोड़ रुपये के राहत पैकेज दिए हैं। अब समय आ गया है की कैप्टन बहानेबाजी छोड़ें और पैकेज की घोषणा करें। लॉकडाउन में मुख्यमंत्री भी 'लॉक' रहे। उन्होंने लोगों की सुध नहीं ली।

इस तरह का पैकेज मांगा

1. घरेलू, व्यापारिक अदारे (दुकानें) व उद्योगों के तीन महीने के बिजली के बिल में 50 फीसद की कटौती की जाए।

2. उत्तर प्रदेश व कर्नाटक सरकार की तर्ज पर टेपों चालक, रिक्शा चालक व रेहड़ी-फड़ी लगाने वालों के बैंक खाते में 5000 रुपये डाले, ताकि वह अपने परिवार का पेट पाल सकें।

3. बार्बर, धोबी, बुनकर व कंस्ट्रक्शन मजदूरों के खाते में भी 5000 रुपये की एकमुश्त राशि दी जाए।

4. किसानों को अगली फसल के लिए अच्छी गुणवत्ता के बीज कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से मुफ्त में उपलब्ध करवाए जाएं।

कांग्रेस नेता महामारी से लड़ने के बजाय भ्रष्टाचार में लिप्त

अश्विनी शर्मा कहा कि इस संकट काल में भी कांग्रेस नेता, विधायक और अफसर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। मुख्यमंत्री ने पंजाब को माफिया राज के हवाले कर दिया है। चीफ सेक्रेटरी व मंत्रियों का विवाद इसी का परिणाम था।

भाजपा किसानों को फ्री बिजली के पक्ष में

अश्वनी शर्मा ने कहा कि पंजाब भाजपा किसानों को फ्री बिजली देने के हक में है। कांग्र्रेस सरकार भ्रम पैदा कर रही है। क्योंकि केंद्र सरकार ने कर्ज लेने के लिए एसजीडीपी की दर तीन से पांच फीसद इस शर्त पर दी है कि राज्य सरकारें लिए गए कर्ज का प्रयोग सब्सिडी देने में न करें। जारी अधिसूचना में कहीं भी फ्री बिजली बंद करने या किसानों का जिक्र नहीं है।

जनता के पैसे की लूट

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि दो महीने में पंजाब में जिस तरह से माइनिंग घोटाला, पीपीई किट घोटाला व बीज घोटाला हुआ है, वह दर्शाता है कि सरकार का ध्यान कोरोना के खिलाफ लड़ाई की बजाय सिर्फ जनता के पैसे की लूट पर था। केंद्र से आए अनाज को जरूरतमंदों तक पहुंचाने में पंजाब सरकार फेल हुई। राशन में बंदरबांट व गरीब को किसी प्रकार की राहत न देने का ही परिणाम है कि लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर पंजाब को छोड़ के वापस अपने स्थानों पर चले गए।

 

Posted By: Kamlesh Bhatt

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