राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को रक्षाबंधन से पहले बड़ी राहत मिली है। एनडीपीएस केस में फंसे मजीठिया को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। हाई कोर्ट ने आज उनके नियमित जमानत की मांग स्वीकार कर ली। मजीठिया पिछले पांच माह से पटियाला जेल में बंद थे।

जस्टिस एमएस रामचंद्र राव एवं जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद 29 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। खंडपीठ ने आज अपना फैसला सुनाते हुए मजीठिया की जमानत की मांग स्वीकार कर ली हालांकि अभी विस्तृत आदेश आना बाकी है।

पांच माह से थे पटियाला जेल में बंद

इससे पहले मजीठिया की इस याचिका पर हाईकोर्ट की दो बेंच सुनवाई से इन्‍कार कर चुकी थी। पहले जस्टिस एजी मसीह ने खुद को इस केस से अलग करते हुए इसे अन्य बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस को भेज दिया था। जस्टिस जस्टिस मसीह की बेंच इस याचिका पर बहस पूरी कर चुकी थी और बेंच मजीठिया की जमानत पर अपना फैसला भी सुरक्षित रख चुकी थी।

इसके बाद याचिका जस्टिस एमएस रामचंद्र राव एवं जस्टिस अनूप चितकारा की खंडपीठ में सुनवाई के लिए आई थी। 15 जुलाई को जस्टिस अनूप चितकारा ने खुद को इस केस से अलग कर लिया। इसके बाद अब चीफ जस्टिस के निर्देश पर इस याचिका जस्टिस एमएस रामचंद्र राव एवं जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने सुनवाई शुरू की थी।

बता दें कि बिक्रम मजीठिया के खिलाफ पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में गत वर्ष 20 दिसंबर को एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने तक मजीठिया की गिरफ्तारी पर रोक लगा कर उन्हें राहत दे दी थी। मतदान के बाद 24 फरवरी को मजीठिया ने मोहाली कोर्ट में सरेंडर कर दिया। जिसके बाद उन्हें पटियाला जेल भेज दिया गया।

इसके बाद 10 मार्च को चुनाव परिणाम आया तो मजीठिया अमृतसर ईस्ट से चुनाव हार गए थे। मजीठिया तब से न्यायिक हिरासत में हैं। इसके बाद मजीठिया ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने उसे हाई कोर्ट जाने की सलाह दी थी। अब जमानत याचिका मई माह से हाई कोर्ट में विचाराधीन थी।

Edited By: Sunil Kumar Jha