जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंस द्वारा निजी डेंटल कालेजों के करीब 400 बीडीएस विद्यार्थियों के दाखिले रद किए जाने को हाई काेर्ट की खंडपीठ में चुनाैती दी गई है। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने पिछले दिनों यूनिवर्सिटी के इस कदम को सही करार दिया था।

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इससे इन विद्यार्थियों के दाखिले रद्द हो गए थे। इन सभी छात्रों को राज्य के निजी डेंटल कॉलेजों ने रिक्त रह गई सीटों पर दाखिला किया था। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ने इन दाखिलों को अवैध करार देते हुए इनका दाखिला रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ इन छात्रों ने हाई कोर्ट की एकल बेंच में याचिका दायर की थी।

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15 जून को जस्टिस आरके जैन पर आधारित एकल पीठ ने सभी याचिका खारिज करते हुए बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के फैसले को सही ठहराया था। पीठ ने कहा था कि इन छात्रों ने निजी कॉलेजों द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर ही दाखिला लिया था। इस दाखिले के लिए इन कॉलेजों ने सरकार और न ही बाबा फरीद यूनिवर्सिटी की स्वीकृति नहीं ली गई।

पीठ ने इसके साथ ही कहा था कि इससे इन छात्रों का जो एक वर्ष का बहुमूल्य समय और पैसा बर्बाद हुआ है उसकी भरपाई के लिए यह छात्र इन निंजी कॉलेजों के खिलाफ आपराधिक या सिविल केस दायर कर सकते हैं।
प्रभावित छात्रों ने खंडपीठ में दायर अपनी अपील में कहा है कि एकल पीठ ने उनका पक्ष सही ढंग से नही सुना और तथ्यों को अनदेखा किया है।

अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की जस्टिस परमजीत पर आधारित खंडपीठ ने इस मामले में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंस व पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न वह एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दे।

Edited By: Sunil Kumar Jha

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