जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : फर्जी महिला एडवोकेट को मिली जमानत को खारिज कराने को लेकर बार एसोसिएशन द्वारा दायर की गई याचिका को जिला अदालत जज अभिषेक फुटेला ने खारिज कर दिया है। सोमवार को अदालत में कामिनी के वकील एनके नंदा ने दलील दी कि कामिनी हाईकोर्ट में बतौर वकील पेश हुई थी इसका कोई सबूत नहीं मिल पाया है। इसके साथ ही कामिनी ने किसी भी गवाह या सबूत के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की है। ऐसे में कामिनी की जामनत को बरकरार रखना चाहिए। वहीं बार एसोसिएशन ने अदालत में कहा कि कामिनी काफी समय से इस तरह के काम में सक्रिय थी। उसने कई खतरनाक अपराधियों को बेल दिलाई है। इतना ही नहीं कामिनी ने खुद को हाईकोर्ट का वकील बताकर पुलिस कर्मियों समेत कई लोगों को धमकाया है। वह काफी समय से लोगों से ठगी कर रही थी। इस काम में वह अकेली नहीं हो सकती, उसके साथ गिरोह जुड़ा हो सकता है। ऐसे में उसे इतनी जल्दी बेल का लाभ नहीं मिलना चाहिए। यह भी कहा कि कामिनी ने कई बार किसी अन्य वकील के एनरोलमेंट नंबर का प्रयोग किया है। दो मई को जिला अदालत से मिल गई थी जमानत आरोपित कामिनी को बीती दो मई को अदालत से जमानत मिल गई थी। जमानत याचिका में कामिनी के वकील एनके नंदा ने कहा कि जिस वक्त कामिनी को पुलिस ने गिरफ्तार किया वह कोर्ट रूम के बाहर थी न कि अंदर। दूसरा यह कि अगर कामिनी कोर्ट रूम में केस लड़ रही थी तो कोर्ट रूम में जस्टिस के सामने उनकी अटेंडेंस हुई होगी और उनके हस्ताक्षर होने चाहिए थे जबकि कामिनी के हस्ताक्षर कहीं पर भी नहीं है। इसके बाद जिला अदालत जज अभिषेक फुटेला ने कामिनी को जमानत दे दी थी।

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Posted By: Jagran

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