चंडीगढ़ [कमल जोशी]। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल व पार्टी के पूर्व महासचिव डॉ. दलजीत सिंह चीमा को हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने दोहरे संविधान के मामले में अकाली नेताओं के खिलाफ होशियारपुर जिला अदालत से जारी समन आदेशों पर रोक लगा दी है। जस्टिस अरविंद सिंह सांगवान ने जिला अदालत में कार्रवाई पर भी रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का नाम मूल शिकायत में दर्ज न होने के बावजूद उनके खिलाफ समन जारी करने पर ट्रायल जज से रिपोर्ट भी मांगी है।

जस्टिस सांगवान ने अपने आदेश में ट्रायल जज को कहा है कि वे इस बात का विवरण दें कि उन्होंने प्रतिवादियों के खिलाफ शिकायतकर्ता की संशोधित शिकायत के तथ्यों के आधार पर आदेश क्यों दिए। उस शिकायत को खारिज कर दिया गया था और उसे कभी मामले के रिकॉर्ड में नहीं रखा गया।

यह है मामला

सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व माल्टा बोट ट्रेजेडी जांच मिशन के चेयरमैन बलवंत सिंह खेड़ा ने फरवरी, 2009 में दायर शिकायत में शिरोमणि अकाली दल पर दो संविधान अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि शिअद ने गुरुद्वारा निर्वाचन आयोग व भारतीय निर्वाचन आयोग को पार्टी के अलग-अलग संविधान सौंपे हैं। अकाली नेताओं के वकीलों ने अदालत को बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री को मूल शिकायत में प्रतिवादी नहीं बनाया गया था और बाद में शिकायतकर्ता ने उन्हें आरोपितों में शामिल करने की मांग को थी, जिसे अदालत ने ठुकरा दिया था।

संविधान में हस्ताक्षर नहीं

भारतीय निर्वाचन आयोग के समक्ष पेश किए गए संविधान में तीनों वरिष्ठ अकाली नेताओं के हस्ताक्षर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शिकायतकर्ता ने चुनाव आयोग में भी शिकायत की थी और चुनाव आयोग ने उसे खारिज कर दिया था। ट्रायल कोर्ट में सुनवाई पर रोक लगाते हुए हाई कोर्ट ने सुनवाई को 28 अप्रैल तक स्थगित कर दिया है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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