चंडीगढ़ [बलवान करिवाल]। किसने सोचा था ऐसा भी समय आएगा जब श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने के लिए भी पहले से अपोइंटमेंट लेनी पड़ेंगी। आजकल सबसे ज्यादा अपोइंटमेंट कहीं ली जा रही हैं तो वह श्मशान घाट है। कोरोना से हालात इतने खराब हो चुके हैं कि बड़ी संख्या में मौत हो रही हैं। मौत का यह मंजर ऐसा है कि श्मशान घाट में संस्कार के लिए भी आधे-आधे घंटे की स्लॉट बनाकर अपोइंटमेंट दी जा रही हैं।

स्लॉट के हिसाब से ही शव को श्मशान घाट लाया जा रहा है, जो अपने स्लॉट में नहीं पहुंचता उसको संस्कार के लिए भी इंतजार करना पड़ता है। चंडीगढ़ में रोजाना 50 से 55 कुल मौत हो रही हैं, जिसमें कोरोना से होने वाली आधिकारिक मौत का आंकड़ा कम है। दैनिक जागरण ने रविवार को श्मशान घाट का जायजा लिया तो चौंकाने वाली बातें निकलकर सामने आई। यहां मौत का मंजर डराने वाला रहा। पेश है श्मशान घाट की लाइव रिपोर्ट...

यह भी पढ़ें: पंजाब में गोबर से बनेगी बिजली, गैस भी होगी तैयार, जर्मन तकनीक का होगा इस्तेमाल

दोपहर 12 बजे मनीमाजरा श्मशान घाट के बाहर लोग बड़ी संख्या में एकजुट हो रहे हैं। आगे बढ़कर देखा तो शव वाहन में शव है और महिलाएं विलाप कर रही हैं। पूछने पर पता चला अंदर अभी जगह नहीं है रुकना पड़ेगा। श्मशान घाट के मुख्यद्वार से अंदर दाखिल हुए तो देखा एक अन्य शव अंतिम क्रियाकर्म के लिए रखा है। जहां चिताएं जलती हैं वहां का मंजर तो और भी डरावना था। चारों तरफ चिता से लपटें उठ रही हैं। छह से अधिक चिताओं में ज्वाला भड़क रही है। एक को अंतिम संस्कार के लिए चिता पर रखा जा रहा है।

यह भी पढ़ें: ओवरलोड हुई पंजाब की जेलें, 90 दिन की छुट्टी पर भेजे जाएंगे 3600 सजायाफ्ता कैदी, प्रक्रिया शुरू

हैरानी की बात तो यह है कि महामारी से श्मशान भरे पड़े हैं इससे सबक लेने के बकी बजाए बिना मास्क ही पहुंच रहे हैं। संस्कार में 10 लोगों को मंजूरी लेकिन यहां शव के साथ महिलाएं ही 50 से अधिक थी। पुरुषों की संख्या तो इससे कहीं ज्यादा थी। श्मशान में बिताए 30 मिनट ने ही झकझोर कर रख दिया।

यह भी पढ़ें: चंडीगढ़ में अंतिम संस्कार के लिए भी अपोइंटमेंट, श्मशान घाट में आग बुझने से पहले ही अगली चिता तैयार

सबसे बड़ा सवाल... यहां शव कहां से आ रहे

कोरोना से अंतिम संस्कार के लिए सेक्टर-25 और इंडस्ट्रियल एरिया के श्मशान घाट को प्रशासन ने चिन्हित कर रखा है। रोजाना तीन बजे से पहले इंडस्ट्रियल एरिया और उसके बाद सेक्टर-25 में इन शवों का संस्कार होता है। यहां रोजाना 30 के करीब संस्कार हो रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कोरोना से मौत पर संस्कार यहां होता है तो दूसरे श्मशान घाट में शवों की लाइन क्यों लगी है। मनीमाजरा में रोजाना 10 से 12 शवों का संस्कार हो रहा है। सेक्टर-28 के श्मशान घाट में भी रोजाना करीब 10 शव लाए जा रहे हैं। मनीमाजरा में तो पंचकूला और जीरकपुर के एरिया से भी शव लाए जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें: पंजाब में कैप्टन व सिद्धू में चल रहा है शह-मात का खेल, हाईकमान चुप, नवजोत के पक्ष में उतरे मंत्री रंधावा

लकड़ी की शॉर्टेज

शव जलाने के लिए अब लकड़ी की शॉर्टेज होने लगी है। एक शव को जलाने में औसतन तीन से चार टन लकड़ी चाहिए। एक ही शमशान घाट में 50 टन लकड़ी की जरूरत रोजाना पड़ रही है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश से लकड़ी मंगवाई जा रही है। सप्लाई में भी दिक्कत आने लगी है।

यह भी पढ़ें: हरियाणा में 1 वर्ष में 6,500 सरकारी कर्मचारियों की छंटनी, करीब 20 विभागों में गई नौकरी

ऐसा मंजर कभी नहीं देखा

श्मशान घाट में क्रियाकर्म करवाने वाले विकास का कहना है कि उनका परिवार दशकों से श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करवा रहा है। अपने जीवन में ऐसा मौत का मंजर पहले कभी नहीं देखा। पिछले साल इन दिनों में पूरा दिन तीन से चार शव आते थे अब 10 से 12 शव आ रहे हैं। संस्कार सभी होने हैं, इसलिए आधे घंटे की स्लॉट में अपोइंटमेंट दी जा रही हैं। कई बार लोग समय पर नहीं आते तो उनके लिए मुश्किल हो जाती है। प्रशासन ने अंतिम संस्कार में 10 लोगों की मंजूरी दे रखी है। बावजूद इसके लोग बड़ी संख्या में आ जाते हैं। कई बार तो पुलिसकर्मी आकर लोगों को वापस भेजते हैं। लोगों से अपील है कि वह समय का ध्यान रखते हुए 10 से कम संख्या में ही अंतिम संस्कार के लिए आए।