चंडीगढ़, राज्‍य ब्‍यूरो। कांग्रेस की अंतर्कलह अभी शांत नहीं हुई है बल्कि अंदर ही अंदर सुलग रही है। अब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबियों में माने जाने वाले राणा गुरमीत सिंह सोढी की शराब फैक्‍टरी के लाइसेंस को लेकर पार्टी में ही सवाल उठाए जा रहे हैं। सोढी ने शिअद- भाजपा सरकार के दौरान इस शराब फैक्टरी का लाइसेंस लिया था। यह सवाल पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष सुनील जाखड़ ने उठाया है। ऐसे में यह मामला सोढी के गले की फांस बन सकता है। तकनीकी तौर पर शराब का प्रोजेक्ट लगाने के लिए लाइसेंस लेना गलत नहीं है लेकिन कांग्रेस के हलकों में चर्चा इस बात को लेकर है कि राणा सोढी को लाइसेंस कैसे मिला।

अब राणा सोढी इस प्रोजेक्ट को फाजिल्का से कहीं और शिफ्ट करवाना चाहते हैं

उधर, पता चला है कि राणा सोढी ने इस प्रोजेक्ट को फाजिल्का के गांव हीरांवाली से कहीं और शिफ्ट करने के लिए पंजाब सरकार को लिखा है क्योंकि इस गांव के लोग यह प्रोजेक्ट यहां नहीं लगवाना चाहते। स्थानीय विधायक दविंदर सिंह घुबाया भी इस प्रोजेक्ट के खिलाफ हैं।

पंजाब कांग्रेस के प्रधान रहते सुनील जाखड़ ने सोनिया गांधी को पत्र लिख कर उठाया था मामला

खेल मंत्री राणा सोढी  पर अपनी जमीन का दोहरा मुआवजा लेने का मामला पहले से ही लटका हुआ है। सोढी को शिअद -भाजपा में लाइसेंस लेने का मुद्दा पार्टी के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ भी उठा चुके हैं। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के अलावा पार्टी प्रधान सोनिया गांधी को भी पत्र लिखा था। कैप्टन अमरिंदर सिंह से उन्होंने जमीन का दोहरा मुआवजा व पूर्व अकाली सरकार से शराब की फैक्टरी के लिए लाइसेंस लेने के मामले में सोढी को कैबिनेट से बर्खास्त करने की मांग उठाई थी। इसके साथ ही उन्‍होंने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में सोढी को पार्टी से निकालने के बारे में लिखा है। हालांकि पूर्व प्रधान ने इस बारे में कोई भी टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया है लेकिन जानकारों की मानें तो उनके इन पत्रों से पार्टी में खलबली मची हुई है।

पार्टी के एक सीनियर मंत्री ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि जाखड़ को जब एक कैबिनेट की मीटिंग में अनौपचारिक तौर पर बुलाया गया था तब भी जाखड़ ने राणा सोढी के रहते मीटिंग कोई भी बात रखने से इन्कार कर दिया था।

काबिले गोर है कि जब हीरांवाली गांव के लोगों ने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू किया था तो वह स्थानीय सांसद व शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल से भी मिले थे। उन्होंने आश्वासन दिया था कि वह खुद उनके साथ प्रदर्शन में शामिल होंगे और यह प्रोजेक्ट यहां लगने नहीं देंगे लेकिन जब सुखबीर बादल को पता चला कि यह प्रोजेक्ट पास ही उनके कर एवं आबकारी मंत्री रहते हुए खुद उन्होंने किया है तो वह धरने में शामिल होने से पीछे हट गए। फाजिल्का के इस गांव में धरनों को देखते हुए सरकार ने यहां प्रोजेक्ट न लगाने का आश्वासन दिया इसीलिए पता चला है कि राणा सोढी अब इस प्रयास में हैं कि इसे कहीं और शिफ्ट करवा लिया जाए।

क्या है यह प्रोजेक्ट

ग्रेन आधारित शराब बनाने के इस प्रोजेक्ट को 28 अगस्त 2015 को मंजूर किया गया था जो प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार 17 अक्टूबर 2017 में तैयार होना था। इसमें 100 किलोलीटर प्रतिदिन शराब तैयार होनी थी साथ ही पांच मेगावाट का को-जेनरेशन प्लांट लगाया जाना था। इस प्रोजेक्ट पर 122.75 करोड़ रुपये की लागत आनी थी।

Edited By: Sunil Kumar Jha