जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : दो कमरे का मकान। पिता ट्रक ड्राइवर। खाने को पैसे नहीं थे। कभी कभार तो दो वक्त का खाना नहीं मिलता था। इसी संघर्ष से गुजरे हैं हरजीत। जिन्होंने हर पल में जीत को ढूंढा और कामयाबी को पाया। कुराली के 22 वर्षीय हरजीत इंडियन मैन्स हॉकी जूनियर व‌र्ल्ड कप के कप्तान रहे और भारत को 20 वर्ष बाद इस प्रतियोगिता में जीत दिलाई। हरजीत की इसी जीत पर फिल्म हरजीता जल्द ही रिलीज होगी। इससे पहले हरजीत वीरवार को होटल माया पैलेस-35 में अपनी जिंदगी और फिल्म बनने के अनुभव को साझा करने के लिए एक्टर एम्मी विर्क के साथ पहुंचे, जो उनकी जिंदगी को फिल्मी पर्दे पर निभाएंगे। निक्कर मिलेगी इसलिए शुरू की हॉकी

हरजीत ने कहा कि उनकी जिंदगी में हॉकी निक्कर के लालच में आई। बोले कि मुझे तो कब्बडी पसंद थी, आज भी है। जब मौका मिले खेल लेता हूं। मगर घर में ऐसी गरीबी थी कि छोटी-छोटी चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ता था। मुझे पहली बार हॉकी ख्याल घर के पास हुई एक हॉकी प्रतियोगिता के दौरान आया। उस प्रतियोगिता में जीतने वाले को निक्कर मिलनी थी। बस मैं भी कूद गया इस दौड़ में। निक्कर तो नहीं मिली, मगर रास्ता मिल गया। फिर में रोजाना अखबार में हॉकी से जुड़ी खबरें पड़ता, उसमें छपे खिलाड़ियों की फोटो देखता। ठान लिया था कि बस अब हॉकी ही खेलनी है। यहीं से मेरी शुरुआत हॉकी खेलने से हुई। जेब में पैसे नहीं थे तो कोच ने एटीएम कार्ड दे दिया

हरजीत ने अपने मुश्किल दिनों को याद करते हुए कहा कि वर्ष 2012 में एशिया कप खेलने के दौरान, उससे पहले बंगलुरू में ट्रायल थे। ट्रायल अच्छा हुआ, मगर एक हफ्ते से कम समय में खेलने के लिए बाहर जाना था। मुझे तो तब पता चला कि इसके लिए पासपोर्ट चाहिए। मुझे न पासपोर्ट बनाने का प्रोसीजर पता था, न ही पैसे थे। ऐसे में मेरे कोच अमृतपाल सिंह ने मेरा पासपोर्ट बनवाया। खेलने गया तो कोई पैसा न था, ऐसे में कोच ने ही मुझे अपना एटीएम कार्ड दे दिया। मेरे अनुसार एक अच्छे कोच के बिना एक अच्छा खिलाड़ी ढूंढना मुश्किल है, आज मुझे जो भी बनाया है इन्हीं कोच की बदौलत में बना हूं।

एक वर्ष की स्ट्रिक्ट डाइट और दो महीने हॉकी खेला हूं

फिल्म हरजीता में एम्मी विर्क पहली बार दुबले पतले नजर आ रहे हैं, उन्होंने कहा कि फिल्म के लिए उन्होंने काफी वजन कम किया। साथ ही अपनी लुक के साथ भी काफी बदलाव किया। हॉकी कभी पकड़ी भी नहीं थी, फिल्म के लिए लगभग दो महीने हॉकी के ग्राउंड के भी चक्कर लगाए। सिर्फ अभिनय करना चाहता हूं

एम्मी ने हरजीत के किरदार निभाने के लिए जो ट्रांसफोर्मेशन किया, इसपर वह इंटरनेट पर काफी ट्रोल भी हुए। एम्मी बोले कि देखिए मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई मेरी लुक पर इंटरनेट पर क्या लिखता है। मेरा मकसद बस किरदार को जीना है। उसके लिए पूरी गहराई में उतरना ही जरूरी है। ये फिल्म आगे चले न चले, मगर हरजीत की जिंदगी लोगों के सामने लाना मेरा मुख्य मकसद था, जिसमें मैं यकीनन कामयाब हुआ।

Posted By: Jagran