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गृहमंत्री शाह की बैठक फिर टली, चंडीगढ़ के मुद्दे अटके; मेयर के कार्यकाल पर अगले महीने फैसला संभावित

Published: Sat, 05 Sep 2026 12:27 PM (IST)

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की चंडीगढ़ से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों पर प्रस्तावित बैठक दूसरी बार टल गई है। इससे मास्टर ...और पढ़ें

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में होना है चंडीगढ़ के मुद्दों पर फैसला। (एआई जनरेटेड फोटो)

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में होना है चंडीगढ़ के मुद्दों पर फैसला। (एआई जनरेटेड फोटो)

HighLights

  1. बैठक अब अगले महीने होने की संभावना।

  2. मास्टर प्लान, फ्रीहोल्ड जैसे मुद्दे अटके।

  3. शहरवासियों की उम्मीदों को लगा झटका।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। शहर के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों की उम्मीद एक बार फिर टल गई है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में वीरवार को दिल्ली में प्रस्तावित बैठक स्थगित कर दी गई। इस बैठक में प्रशासन के मुख्य सचिव सहित अन्य आला अधिकारी शामिल होने वाले थे।

अब अगले महीने बैठक होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे मास्टर प्लान-2031 में बदलाव, पुनर्वास काॅलोनियों के अलॉटीज को मालिकाना हक, लीजहोल्ड व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने तथा मेयर का कार्यकाल बढ़ाने जैसे मुद्दे फिर से लटक गए हैं।

यह ध्यान देने योग्य है कि इन प्रस्तावों पर चर्चा के लिए पहले भी बैठक प्रस्तावित हुई थी, लेकिन वह भी स्थगित हो गई थी। दूसरी बार बैठक टलने से शहरवासियों और संबंधित वर्गों की उम्मीदों को झटका लगा है। लंबे समय से लंबित मामलों पर निर्णय न होने से इनका समाधान भी लटकता जा रहा है।

मास्टर प्लान में प्रस्तावित बदलावों के तहत चिह्नित परिधीय और फेज-3 क्षेत्रों में एफएआर 3.0 करने, चयनित क्षेत्रों में 30 मीटर तक ऊंची इमारतों की अनुमति और औद्योगिक प्लाटों के विभाजन जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। फ्रीहोल्ड प्रस्ताव से करोड़ों रुपये की संपत्तियों के अनलॉक होने की उम्मीद है।

वहीं, पुनर्वास काॅलोनियों के अलॉटीज को स्थायी मालिकाना हक देने और मेयर का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने के प्रस्ताव पर भी निर्णय होना है। नगर निगम चुनाव प्रक्रिया के नजदीक होने के कारण मेयर के कार्यकाल से जुड़ा निर्णय विशेष महत्व रखता है।

प्रशासन की ओर से इन प्रस्तावों पर गृह मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुति दी जानी है। अब सभी की नजर अगले महीने प्रस्तावित बैठक पर है। यदि बैठक फिर टलती है, तो लंबित मुद्दों पर फैसले की प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।