चंडीगढ़, राज्‍य ब्‍यूरो। केंद्र सरकार की ओर से राज्य में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने के विरोध में  मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। इसमेंं फैसला किया गया कि बीएसएफ का दायरा बढ़ाने के नोटिफिकेशन व केंद्रीय कृषि कानूनों को पंजाब में रद करने के लिए राज्‍य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा। बैठक में तय किया गया है कि बीएसएफ की पुरानी वाली स्थिति को बरकरार रखने के लिए पंजाब सरकार न सिर्फ विधान सभा का विशेष सत्र बुलाएगी बल्कि सुप्रीम कोर्ट और सत्याग्रह का सहारा भी लेगी। हालांकि आप ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिल कर बगैर किसी कारण के सीमा को सील करने की मांग को लेकर लोगों को स्पष्टीकरण देने के लिए कहा।     

बैठक में कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी सहित कई अन्‍य दलों के नेता इसमें शामिल हुए । पंजाब कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्‍यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू बैठक में पहुंंचे हैं। पंजाब भाजपा ने इस बैठक का बहिष्‍कार किया है।

आल पार्टी बैठक के बाद मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि बीएसएफ की नोटिफिकेशन और  कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए पंजाब विधानसभा का सत्र बुलाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो सत्याग्रह किया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा। 

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू, डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा भी आल पार्टी बैठक के लिए पहुंचे। आम आदमी पार्टी के अमन अरोड़ा भी पहुंच हैं। शिरोमणि अकाली दल की तरफ से डा. दलजीत सिंह चीमा और प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा  बैठक में भाग लिया।  

सुप्रीम कोर्ट में याचिका और सत्याग्रह का रास्ता भी अपनाया जाएगा : चन्नी

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का दायरा 15 से 50 किलोमीटर किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शर्तों के साथ आम आदमी पार्टी ने पंजाब सरकार को समर्थन दिया है। पंजाब भवन में लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली सर्वदलीय बैठक के उपरांत मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा गया था लेकिन इसका कोई जवाब नहीं आया। इस लिए सर्वदलीय बैठक में यह तय किया गया है कि विधान सभा का विशेष सत्र बुलाकर केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना को रद्द किया जाएगा। इसके लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएगी और सत्याग्रह भी किया जाएगा। साथ ही तीनों कृषि कानूनों को भी रद्द किया जाएगा।

 विधानसभा में खेती कानून भी रद हो, घुटने टेकने की जरूरत नहीं: सिद्धू

इससे पहले नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि जब भी चुनाव आने वाले होते हैं तो  राज्य का माहौल खराब होता है। उन्होंने केंद्र सरकार के इस फैसले को राज्य के अंदर एक और राज्य खड़ा करने वाला बताया। उन्होंने इसे एक तरह से राष्ट्रपति शासन भी कहा। उन्होंने कहा, कानून व्यवस्था राज्य का विषय है लेकिन केंद्र सरकार राज्यों के मौलिक अधिकार को छीन रही है। फिर चाहे कृषि कानून हो या बीएसएफ का दायरा बढ़ाना।

पश्चिम बंगाल का उदहारण देते हुए सिद्धू ने कहा, वहां पर सीमा सुरक्षा बल द्वारा 240 लोगों से अतिरिक्त टार्चर के केस आए और 60 व्यक्तियों को तो मार ही दिया गया। केंद्र सरकार पिछले दरवाजे से पंजाब में एंट्री करना चाहती है क्योंकि भाजपा का पंजाब में राजनीतिक आधार खत्म हो गया है।

सिद्धू ने कहा कि बीएसएफ का दायरा बढ़ाना राजनीतिक से प्रभावित होकर लिया गया फैसला है। सिद्धू ने कहा, घुटने टेकने की आवश्यकता नहीं है। विधान सभा के विशेष सत्र बुलाकर बीएसएफ का दायरा बढ़ाने और कृषि कानूनों को रद्द किया जाना चाहिए। इसके लिए अगर सभी पार्टियों के साथ मिल कर सत्याग्रह किया जाएगा।

मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि पंजाब के लिए कोई भी कुर्सी या ओहदा वह त्याग करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि आज की बैठक में सभी पार्टियों ने सरकार को समर्थन दिया है। इसके लिए उन्होंने सभी नेताओं का धन्यवाद भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 10 से 15 दिनों में विधान सभा का सत्र बुलाया जाएगा। जहां पर कृषि कानूनों के साथ-साथ बीएसएफ का दायरा बढ़ाने की अधिसूचना को भी रद किया जाएगा। इसके लिए एक दो दिनों में कैबिनेट बैठक करके प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा। सरकार सुप्रीम कोर्ट भी जाएगी।

आप ने मुख्यमंत्री को ही घसीटा, शर्तों पर ही सरकार के साथ

मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भले ही सभी पार्टियों का समर्थन मिलने की बात कही लेकिन आप के प्रधान व सांसद भगवंत, हरपाल चीमा और अमन अरोड़ा ने सर्वदलीय बैठक में मुख्यमंत्री को ही कटघरे में खड़ा किया। मान ने सवाल उठाया कि बगैर किसी वजह से मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सीमाओं को सील करने की बात क्यों की? मुख्यमंत्री को पंजाब के लोगों को बताना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने गृह मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा से सवाल किया कि क्या उन्होंने (रंधावा) केंद्र सरकार के साथ कब संपर्क किया कि आखिर केंद्र ने यह फैसला क्यों किया। मान ने पूरे मामले की टाइमिंग पर सवाल खड़े किए। पहले मुख्यमंत्री अमित शाह से मिलते है, उसके बाद केंद्र बीएसएफ का दायरा बढ़ाती है। मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने अपने प्रेजेंटेंशन में भी बताया है कि कोई भी ड्रोन सीमा के 3 से 4 किलोमीटर के दायरे से ज्यादा अंदर नहीं आया है।

मान ने कहा कि बीएसएफ का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्री रहते हुए पी. चितंबरम लेकर आए थे। तब केवल सिक्कम सरकार ने ही इसका विरोध किया था। पंजाब में तब शिरोमणि अकाली दल और भाजपा की सरकार थी। केंद्र सरकार द्वारा पांच बार रिमाइंडर देने के बावजूद सरकार ने अपना पक्ष नहीं रखा था। मान ने कहा कि आप पंजाब के लिए खड़ी है लेकिन इस कानून को अभी लोक सभा और राज्य सभा में पास होना है। कांग्रेस की मंशा अगर साफ होगी तो आप साथ देगी नहीं तो कांग्रेस के चरित्र को उजागर करेगी।

दूसरी ओर,  भाजपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोरंजन कालिया ने कहा कि पूर्व में बीएसएफ के पास 15 किलोमीटर का दायरा था, तब तक किसी भी सरकार को कोई परेशानी नहीं हुई। अब तक सीमा पार से हथियार और नशा आ रहा है और बीएसएफ का दायरा बढ़ाया गया है तो राजनीतिक पार्टियों को दिक्कत हो रही है। मनोरंजन कालिया का कहना है कि देश की सुरक्षा को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसलिए भाजपा ने सर्वदलीय बैठक का बायकाट किया है।

काबिलेगौर है कि चन्नी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र पर यथास्थिति बनाए रखने की मांग की थी। यह भी कहा था कि केंद्र सरकार संघवाद की भावना को कमजोर करने और संविधान के संघीय ढांचे को बिगाड़ने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा था कि पंजाब की पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर व फाजिल्का के कुल क्षेत्रफल का 80 फीसद से अधिक इस दायरे में आते हैं। इन सीमावर्ती जिलों का जिला मुख्यालय भी भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे में हैं।

Edited By: Sunil Kumar Jha