आनलाइन डेस्क, चंडीगढ़। चंडीगढ़ में 26 सितंबर यानी सोमवार को सरकारी अवकाश रहेगा। चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है। इस दौरान सभी सरकारी कार्यायल, बोर्ड निगमों के दफ्तर व सभी तरह के शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। 

26 सितंबर को महाराजा अग्रसेन जयंती है। शहर में पहली बार अग्रसेन जयंती पर सरकारी छुट्टी घोषित की गई है। पंजाब व हरियाणा में पहले से ही अग्रसेन जयंती की छुट्टी घोषित की जा चुकी है। चंडीगढ़ में पहली बार महाराजा अग्रसेन जयंती पर छुट्टी होने से अग्रवाल समाज के लोगों में खुशी है। क्योंकि अग्रवाल समाज के लोग प्रशासन से पहले भी अग्रसेन जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की मांग करते आए हैं। इस दिन व्यापार संघ के लोग महाराज अग्रेसन की पूजा अर्चना करते हैं। अग्रसेन जयंती हरियाणा, राजस्थान, यूपी समेत देश के अन्य राज्यों में धूमधाम से मनाई जाती है।

बता दें कि 26 सितंबर को पहला नवरात्र भी है। ऐसे में शहरवासियों को छुट्टी होने का लाभ मिलेगा। क्योंकि नवरात्र के दिन श्रद्धालु मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए पहुंचेंगे। छुट्टी होने से शहर के लोगों को मंदिरों में पूजा पाठ के लिए जल्दबाजी नहीं रहेगी। 

कौन थे महाराजा अग्रसेन

महाराजा अग्रसेन भगवान श्रीराम के वंशज माने जाते हैं। महाराजा अग्रसेन अग्रवाल समाज के पितामह और वैश्य समाज का संस्थापक भी माने जाते हैं। हर साल अश्विन शुक्ल प्रतिपदा को महाराजा अग्रसेन का जन्मोत्सव मनाया जाता है। महाराजा अग्रसेन श्रीराम की 34वीं पीढ़ी में द्वापर के अंतिम काल और कलयुग के प्रारंभ में जन्मे थे। वह प्रताप नगर के राजा वल्लभसेन और माता भगवती देवी के बड़ी संतान थे। प्रताप नगर राजस्थान और हरियाणा के बीच सरस्वती नदी के किनारे बसा है।

महाराजा अग्रसेन से जुड़ी पौराणिक कथा

महाराजा अग्रसेन बचपन से ही पराक्रमी और तेजसवी थे। उनका विवाह नागराज मुकुट की बेटी माधवी से हुआ था। एक बार इंद्रदेव के श्राप से महाराजा अग्रसेन के राज्य में सूखा पड़ गया था। लोगों में हाहाकार मच गया, राज्य की आर्थिक व्यवस्था भी चरमरा गई। ऐसे में महाराजा अग्रसेन ने भगवान शिव से खुशहाली और मां लक्ष्मी से धन संपदा लौटाने की कामना करते हुए तप किया था। उनकी कड़ी तपस्या से प्रसन्न हुए भगवान शिव ने राज्य में खुशहाली लौटा दी। वहीं माता लक्ष्मी ने प्रसन्न होकर उन्हें साक्षात दर्शन दिए और धन वैभव प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया

18 गोत्रों की स्थापना

महाराजा अग्रसेन ने राज्य के नागराज महिस्त कन्या सुंदरावती से दूसरा विवाह किया। इससे उन्हें 18 पुत्रों की प्राप्ति हुई। राजा अग्रसेन ने माता लक्ष्मी के कहे अनुसार वैश्य समाज की स्थापना की। अग्रोहा राज्य को 18 भागों में बांट दिया और 18 गोत्रों की स्थापना की।

Edited By: Ankesh Thakur

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