यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 25, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Punjab Farmers Protest: CM मान के साथ बैठक के बाद माने किसान, रेल ट्रैक व हाईवे खुला
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक के बाद किसान संगठनों ने जालंधर कैंट के पास रेल ट्रैक व ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक के बाद किसान संगठनों ने जालंधर कैंट के पास रेल ट्रैक व दिल्ली-अमृतसर हाईवे से धरना हटा दिया। मान ने किसानों की मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया है। किसान संगठन गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने की मांग को लेकर गत मंगलवार से जीटी रोड पर धरना दे रहे थे। गुरुवार को रेल ट्रैक पर भी धरना शुरू करने से कई ट्रेनों को रद व डायवर्ट करना पड़ना था, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई थी। ज्ञात हो, गन्ने की एमएसपी 380 रुपये प्रति क्विंटल है, किसान 450 रुपये करने की मांग कर रहे हैं।
धरना खत्म होने के बाद हाईवे पर वाहनों की आवाजाही सुचारू हो गई है। रेल यातायात भी सामान्य होने लगा है। पहले जिन ट्रेनों (शताब्दी, शान-ए-पंजाब आदि) को शार्ट टर्मिनेट किया गया था उनकी शुक्रवार को जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन पर आवाजाही नहीं हुई। अन्य ट्रेनों का परिचालन सामान्य होने लगा है। रेल अधिकारियों का कहना है कि शनिवार को सभी ट्रेनों का परिचालन पटरी पर लौट आएगा। शुक्रवार को दिनभर भी यात्री परेशान रहे और धरने प्रदर्शन के लिए किसानों के तरीके को कोसते रहे।
दिल्ली से पंजाब व जम्मू-कश्मीर की तरफ आने वाली ट्रेनें बुरी तरह प्रभावित रहीं। जम्मू मेल समेत चार ट्रेन रद कर दी गईं। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, गन्ने की नई कीमत निर्धारित करने के संबंध में शनिवार को चीनी मिल मालिकों से बात की जाएगी। इसके बाद गन्ने की वर्ष 2023-24 के लिए कीमत तय की जाएगी। उन्होंने कहा, यह कहना गलत है कि अब गन्ने से सिर्फ चीनी बनती है।
इथनाल सहित और भी प्रोडक्ट बनते हैँ, जिससे मिल मालिकों को लाभ हो रहा है। मान ने कहा, पंजाब तो पहले ही ऐसा राज्य है जिसमें गन्ने की एमएसपी सबसे ज्यादा है। अगर कुछ दिन पहले हरियाणा द्वारा 14 रुपये प्रति क्विंटल रेट न बढ़ाया जाता तो आज भी ज्यादा होती।
पराली को लेकर सीएम बाेले, पीएम को पहल करनी चाहिए। अगर वह यूक्रेन व गाजा में फंसे भारतीयों को निकालने की बात कर रहे हैं तो पराली का मसला सुलझाने के मामले में राज्यों की बैठक क्यों नहीं बुलाते? मान ने किसानों से कहा,रेल और सड़क मार्ग रोकना समस्या का समाधान नहीं है और न ही सरकार को इससे झुकाया जा सकता है। बार-बार रेल व सड़क जाम करने से लोगों को परेशानी होती है। किसान संगठनों ने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसा नहीं करेंगे।
