सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़

शहर के डिग्री कालेजों में कार्यरत तीन हजार टीचिग स्टाफ पर सेंट्रल सर्विस रूल्स लागू होंगे या पंजाब सर्विस रूल्स। यह जबाव 25 जनवरी तक सलाहकार धर्म पाल मिनिस्ट्री आफ अफेयर (एमएचए) को देंगे। उल्लेखनीय है कि 2018 में चंडीगढ़ गवर्नमेंट कालेज टीचर एसोसिएशन (सीजीसीटीए) ने मिनिस्ट्री आफ होम अफेयर में चंडीगढ़ के सर्विस रूल्स के खिलाफ अपील की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए 10 जनवरी को एमएचए ने चंडीगढ़ प्रशासन के एडवाइजर से 25 जनवरी तक सर्विस रूल्स पर जबाव मांगा था। ये है मामला : शहर के डिग्री कालेज में टीचिग स्टाफ को यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) के नियमों के अनुसार भर्ती किया जाता है। एक बार भर्ती के नियम पूरे होने के बाद टीचिग स्टाफ पर पंजाब सर्विस रूल्स जनवरी 1992 को लागू कर दिया जाता है, जिसमें स्टाफ को तीन साल तक कांट्रेक्ट पर काम करना होता है। रेगुलर होने के बाद यूपीएससी नियमों का उल्लंघन करके पंजाब सर्विस रूल्स के अनुसार वेतन दिया जाता है। यूपीएससी से भर्ती के बाद सेवानिवृत्ति 65 वर्ष है, जबकि पंजाब सर्विस रूल्स के अनुसार चंडीगढ़ के टीचिग स्टाफ को 60 वर्ष की आयु में विदाई दी जा रही है।

जनवरी 1992 के बाद तीन बार केंद्र कर चुका है सर्विस नियमों में संशोधन

केंद्र सरकार समय-समय पर सर्विस रूल्स को संशोधित करती है। 13 जनवरी 1992 को केंद्र ने नियम बनाए, जिसे पंजाब सरकार ने वेतन बढ़ोतरी के साथ लागू किया। चंडीगढ़ स्वतंत्र केंद्र शासित प्रदेश नहीं था, जिसके चलते उस समय प्रशासन ने केंद्र के नियमों को मानने के बजाए पंजाब सर्विस रूल्स को अडॉप्ट कर लिया। 1998 में केंद्र सरकार ने दूसरी, वर्ष 2010 में तीसरी और वर्ष 2016 में चौथी बार सर्विस नियमों में केंद्र सरकार ने संशोधन किया, लेकिन चंडीगढ़ भर्ती नियम यूपीएससी और नौकरी में ज्वाइन होने के बाद पंजाब सर्विस रूल्स 1992 को अडॉप्ट कर रहा है। चंडीगढ़ प्रशासन के इसी रवैये के चलते पहले सीजीसीटीए और उसके बाद शहर के टेक्नीकल कालेज से आल इंडिया काउंसिल फार टेक्नीकल एजुकेशन (एआइसीसीटी) ने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट और एमएचए की शरण ली।

पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने एआइसीसीटी मामले में फैसला टीचर्स के पक्ष में दिया। चंडीगढ़ प्रशासन हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन फैसला फिर से टीचर्स के हक में था। उसी तर्ज में अब एमएचए ने प्रशासन के सलाहकार से सीजीसीटीए मामले पर जबाव मांगा है।

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